congress rahul gandhi rajya sabha राहुल की योजना में फिट नहीं कई नेता
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राहुल की योजना में फिट नहीं कई नेता

ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस पार्टी के कई बड़े नेता राहुल गांधी की योजना में फिट नहीं बैठ रहे हैं। दशकों से पार्टी में होने और सरकार व संगठन में बड़े पदों पर रहने की वजह से वे अब भी पार्टी में हैं और सीमित अर्थों में उनकी भूमिका भी बनी हुई है पर आगे की योजना में उनके लिए कोई स्थान नहीं है। पंजाब में बदलाव इसका एक संकेत है तो राज्यसभा की सात सीटों के उपचुनावों के दौरान कांग्रेस की राजनीति इसका दूसरा संकेत है। राहुल चाहते तो कांग्रेस के दो बड़े नेता गुलाम नबी आजाद और मुकुल वासनिक राज्यसभा में जा सकते थे, लेकिन उन्होंने दोनों की संभावना खत्म करा दी। congress rahul gandhi rajya sabha

कहा जा रहा है कि इन दोनों को अगले साल अप्रैल में होने वाले दोवार्षिक चुनावों में उच्च सदन भेजा जा सकता है। लेकिन जिस तरह से राहुल गांधी राजनीति कर रहे हैं उसे देखते हुए इसकी संभावना कम ही लग रही है। सबसे दिलचस्प मामला गुलाम नबी आजाद का है। आजाद इस साल के शुरू में राज्यसभा से रिटायर हुए। वे उच्च सदन में नेता विपक्ष थे। उनके विदाई भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतने भावुक हो गए कि उनके आंसू निकल पड़े। तभी लग गया था कि अब शायद कांग्रेस की राजनीति में आजाद की जगह खत्म हो गई है। हालांकि पिछले दिनों राहुल गांधी जम्मू गए तो आजाद उनके साथ थे और राहुल ने उन्हें काफी महत्व भी दिया। इसके बावजूद उनको राज्यसभा नहीं भेजा।

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सोचें, राहुल गांधी को एक सीट तमिलनाडु में बोनस के तौर पर मिल रही थी। मोहम्मदजान की खाली हुई सीट पर डीएमके ने कांग्रेस के उम्मीदवार को उच्च सदन भेजने की सहमति दी थी। उन्होंने राज्य के प्रभारी रहे गुलाम नबी आजाद का नाम नहीं बताया था लेकिन कहा था कि कांग्रेस किसी मुस्लिम को उम्मीदवार बनाए तो वे वह सीट उसको दे देंगे और बाकी दो सीटों पर डीएमके अपना नेता उच्च सदन में भेजेगी। जानकार सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी ने इस बारे में एमके स्टालिन से बात ही नहीं ही। उन्होंने बोनस में मिल रही सीट सिर्फ इसलिए छोड़ दी की गुलाम नबी आजाद को राज्यसभा भेजना होगा। अगर वे स्टालिन से बात करते तो राज्य तो तीन में से एक सीट कांग्रेस को मिलती।

महाराष्ट्र में तो खैर कांग्रेस की अपनी सीट है, जो पार्टी के नेता राजीव सातव के निधन से खाली हुई है। शिव सेना और एनसीपी ने इस सीट पर दावा नहीं किया। कांग्रेस ने इस सीट से रजनी पाटिल को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। वे पहले भी राज्यसभा में थीं और अभी जम्मू कश्मीर की प्रभारी हैं। जिस दिन उनकी विदाई हुई थी उस दिन सोनिया गांधी उनको अपनी गाड़ी में बैठा लेकर गई थीं और उसी दिन से माना जा रहा था कि उनको राज्यसभा भेजा जाएगा। हालांकि एक सीट के उपचुनाव में मुकुल वासनिक को भेजने की चर्चा थी। लेकिन पार्टी ने वासनिक को भी रोक दिया। अगले साल दोवार्षिक चुनाव में कांग्रेस को दो-तीन अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं लेकिन उन सीटों के लिए दावेदारों की लंबी सूची है।

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