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राजरंग| नया इंडिया| Mamata Banerjee Prashant Kishor कांग्रेस क्या अब सुलह चाहती है?

कांग्रेस क्या अब सुलह चाहती है?

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ममता बनर्जी ने जब तंज किया कि यूपीए कहा हैं और उसके बाद उनके चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कांग्रेस के नेता के तौर पर एक व्यक्ति के दैवीय अधिकार पर सवाल उठाए तो कांग्रेस नेताओं ने उनके ऊपर बड़े हमले किए। कांग्रेस के ट्रोल्स और कांग्रेस समर्थक बुद्धिजीवियों ने भी प्रशांत किशोर को निशाना बनाया और यहां तक आरोप लगाया कि ममता और उनके चुनाव रणनीतिकार विपक्षी एकता को को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जिसका एकमात्र मकसद भाजपा को फायदा पहुंचाना है।

लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस सुलह सफाई की कोशिश में लग गई है। कांग्रेस की ओर से ममता बनर्जी की ओर समझौते का हाथ बढ़ाया जा रहा है। कांग्रेस आलाकमान के करीबी नेता पी चिदंबरम ने ममता बनर्जी की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और ममता बनर्जी की एप्रोच को एक हो जाना चाहिए। चिदंबरम ने दोनों का लक्ष्य एक बताते हुए कहा कि इसको ‘कन्वर्ज’ हो जाना चाहिए। पर मुश्किल यह है कि ममता बनर्जी इस समय कांग्रेस के साथ किसी तरह के तालमेल के मूड में नहीं दिख रही हैं।

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जिस दिन पी चिदंबरम ने दोनों की एप्रोच के एक होने की बात कही उसके दो दिन बाद ही प्रशांत किशोर ने कांग्रेस पर तीखा हमला किया। एक मीडिया समूह को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि विपक्ष के स्पेस पर कांग्रेस का एकाधिकार नहीं है और दूसरी पार्टियों को भी अपनी लीडरशिप प्रोजेक्ट करनी चाहिए। अपनी रणनीति के तहत प्रशांत किशोर हर क्षेत्रीय पार्टी से अपना नेतृत्व आगे करने की अपील कर रहे हैं ताकि कांग्रेस के नेतृत्व को कमजोर किया जा सके।

उधर पश्चिम बंगाल में राहुल गांधी के करीबी प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी को निशाना बनाया तो पार्टी के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि अधीर रंजन चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी पश्चिम बंगाल में शून्य पर पहुंच गई। गौरतलब है कि इस साल हुए विधानसभा चुनाव पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली है और उसका वोट प्रतिशत भी काफी कम हो गया है। बहरहाल, कांग्रेस पार्टी को खतरा दिखने लगा है। कांग्रेस के नेता मान रहे हैं कि अगले दो साल में होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन सुधरेगा तो अखिल भारतीय स्तर पर उसका माहौल बन सकता है। लेकिन ममता बनर्जी और  प्रशांत किशोर की टीम उससे पहले ही कांग्रेस को इतना कमजोर कर देने की योजना पर काम कर रहे हैं कि कांग्रेस 2022 और 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों में अपना प्रदर्शन सुधार ही नहीं पाए। तभी कांग्रेस की ओर से सुलह के प्रयास हो रहे हैं।

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