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नेता की घोषणा करे कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी को दिए अपने प्रेजेंटेशन में चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने विपक्ष की ओर से नेता या चेहरा पेश किए जाने के मसले पर चुप रह गए थे। उनका जोर इस बात पर था कि विपक्ष एक नैरेटिव बनाए और उस नैरेटिव को लगातार चलाए रहे। ऐसा करने पर बिना चेहरे के भी भाजपा और नरेंद्र मोदी को चुनौती दी जा सकती है। उनकी सलाह का यह पार्ट तो ठीक है कि विपक्ष नैरेटिव बनाए और उसे चलाए रखे, लेकिन उसके बाद चेहरा अपने आप बनेगा, यह बात ठीक नहीं है। नैरेटिव बनाने के साथ ही विपक्ष और खास कर कांग्रेस को चेहरा भी पेश करना ही होगा। इसलिए उदयपुर का चिंतन शिविर अहम है, जिसमें कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी को नेता घोषित कर दे।

वैसे भी कांग्रेस घोषित करे या न करे भाजपा ने नरेंद्र मोदी का मुकाबला राहुल गांधी से बनवा रखा है। तभी हर सर्वेक्षण में या हर बहस में मोदी के मुकाबले राहुल को पेश किया जाता है। जब भी मोदी सरकार के कामकाज पर सर्वेक्षण होता है या नेताओं की लोकप्रियत का सर्वेक्षण होता है तो उसमें मोदी के मुकाबले राहुल ही रखे जाते हैं। भाजपा की ओर से प्रचार किया जाता है कि जब तक राहुल हैं तब तक मोदी को कोई दिक्कत नहीं है। सोशल मीडिया के मजाक में राहुल को भाजपा के लिए सबसे बड़ा असेट बताया जाता है।

अभी भाजपा ने अपनी ओर से कमजोर पहलवान जान कर राहुल गांधी को चुना है। अब समय है कि कांग्रेस आगे बढ़ कर अपनी ओर से चुनौती दे और राहुल बनाम मोदी के मुकाबले का ऐलान करे। याद करें कैसे नरेंद्र मोदी ने लड़ कर भाजपा से अपने नाम पर मुहर लगवाई थी। अभी वहीं समय है। उदयपुर का चिंतन शिविर कांग्रेस और राहुल के लिए गोवा मोमेंट है। जैसे 2013 में गोवा अधिवेशन में लालकृष्ण आडवाणी और उनके खेमे के डी-फोर नेताओं के विरोध के बावजूद नरेंद्र मोदी भाजपा के चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष बने और उसके बाद प्रधानमंत्री पद के दावेदार बने उसी तरह कांग्रेस को चाहिए कि राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित करे।

राहुल गांधी कहते रहते हैं कि उनको सत्ता की चाह नहीं है, लेकिन इससे कांग्रेस का भला नहीं होगा। कांग्रेस का भला तब होगा, जब वे अपनी तरफ से चल कर चुनौती देंगे। भाजपा ने तो उनको दावेदार बना ही दिया है इसलिए अपनी तरफ से दावेदार बनने में कोई दिक्कत नहीं है। अगर साहस है, अपने एजेंडे के प्रति प्रतिबद्धता है, संगठन की ताकत का भरोसा है तो कांग्रेस अगली बार राहुल सरकार का ऐलान करे। मोदी में हिम्मत थी अपने नाम का ऐलान करके चुनाव लड़ने की तो उन्हें अपने नाम का ऐलान कराया और आज राज कर रहे हैं। राहुल और कांग्रेस को भी वैसी ही हिम्मत दिखानी होगी।

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