किसी भी चीज से इलाज है कोरोना का!

यह असली भारतीयता है कि कितना भी बड़ा संकट हो हम उसका मजाक बना देते हैं और कितनी भी गंभीर बीमारी हो हम उसके इलाज का कोई न कोई वैकल्पिक साधन खोज लेते हैं। फिर चाहे उस इलाज से मरीज की मौत ही क्यों न हो जाए। यहीं काम इन दिनों कोरोना वायरस के संकट के बीच भारत में हो रहा है। भारत में किसी भी चीज से इलाज किया जा रहा है और यह किसी को पता नहीं है कि उसमें मेडिकल के जरूरी मानकों का इस्तेमाल हो रहा है या नहीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन, डब्लुएचओ ने अब हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के परीक्षण की इजाजत दे दी है पर जब उसने पाबंदी लगा रखी थी तब भी भारत में इस दवा से मरीजों का इलाज किया जा रहा था।

इसी तरह अब भारत में अमेरिकी कंपनी गिलियड सांइस की दवा रेम्डिसिवीर से भी कोरोना के मरीजों के इलाज की तैयारी चल रही है। अब तक इस दवा का कुल जमा हासिल यह है कि इसका डोज देने से 11वें दिन जाकर मरीज कुछ ठीक दिखे हैं। पर भारत में इस महंगी दवा का इस्तेमाल होगा। इस बीच होड़ लगा कर भारत के होमियपैथिक डॉक्टर कोरोना का इलाज कर रहे हैं। कुछ तो सीधे बीमारी ठीक करने की दवा दे रहे हैं और जो ज्यादा समझदार है वह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवा दे रहा है और दावा कर रहा है कि इससे कोरोना ठीक हो रहा है। इस बीच आयुर्वेदिक दवा बेचने वाले पीछे क्यों रहते, उन्होंने भी अश्वगंधा और पता नहीं किन किन जड़ी-बूटियों से इलाज का दावा कर दिया। कुछ दिन पहले खबर आई थी मध्य प्रदेश में एक जिले के कलेक्टर ने तो पतंजलि वाले रामदेव की एक दवा के परीक्षण की इजाजत दे दी थी। सोचें, इस किस्म का परीक्षण बिना दवा नियंत्रण प्राधिकरण की मंजूरी के नहीं हो सकता है। पता नहीं किस दवा के परीक्षण की किसने मंजूरी दी पर इन दिनों भारत में कर किस्म की दवाओं का अपने आप इस्तेमाल हो रहा है।

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