सेना के करतब की जरूरत क्यों पड़ी?

भारतीय सेना के तीनों अंगों ने रविवार को खूब करतब दिखाए। उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम में भारतीय वायु सेना के के लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी। फ्लाई पास्ट किया। विमानों ने न्यूनतम ऊंचाई से उड़ान भरी। सेना के हेलीकॉप्टर से कोविड-19 के डेडिकेटेड अस्पतालों पर फूल बरसाए गए। कोरोना वायरस का इलाज कर रहे अस्पतालों के आगे सेना के बैंड का प्रदर्शन हुआ। हालांकि अस्पतालों के आगे गाड़ियों का हॉर्न तक बजाना मना होता है पर इसकी किसे परवाह है। नौसेना के जंगी जहाजों पर रोशनी की गई और इस तरह से कोरोना वॉरियर्स के प्रति आभार जताया गया। रविवार को ही जम्मू कश्मीर से खबर आई कि सेना के एक कर्नल और मेजर सहित पांच सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए हैं।
बहरहाल, बड़ा सवाल यह है कि सेना से यह सब कराने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या इसलिए कि अमेरिका में भी इसी तरह सेना ने करतब दिखाया है? शनिवार को अमेरिका में वायु सेना की दो विशेष विंग ने राजधानी वाशिंगटन के अलावा दो और राज्यों- बाल्टीमोर और अटलांटा में फ्लाई पास्ट किया और कोरोना वॉरियर्स का आभार जताया। सो, संभव है कि उसी की तर्ज पर भारत में भी यह आयोजन हुआ है। पर अमेरिका में राष्ट्रपति ने आम नागरिकों से ताली, थाली बजवा कर या घरों के आगे दीये जलवा कर कोरोना वॉरियर्स का आभार नहीं जताया था। इसलिए सीधे सेना को उतार दिया गया। पर भारत में तो आभार जताने का काम आम लोगों करते हैं। फिर आम लोगों से आभार जतलाने के लिए कोई इवेंट करने की बजाय सेना का इवेंट क्यों कराया गया?

ध्यान रहे इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर 22 मार्च को देश के लोगों ने शाम पांच बजे, पांच मिनट तक अपने अपने घरों के सामने खड़े होकर ताली और थाली बजाई और कोरोना वॉरियर्स का आभार जताया। हालांकि तब कोरोना के खिलाफ कायदे से लड़ाई शुरू भी नहीं हुई थी। उसके बाद फिर मोदी की अपील पर पांच अप्रैल को रात नौ बजे, लोगों ने अपने घरों के आगे दीये जाए। उस तरह की अपील प्रधानमंत्री ने इस बार क्यों नहीं की? क्या उनको लग रहा है कि अब उनकी अपील बहुत असरदार नहीं रहेगी? कोरोना वायरस की वजह से 40 दिन से घरों में बंद और काम-काज, नौकरी, रोजगार सब गंवाने वाली जनता उनकी बात नहीं मानेगी? यह संभव है क्योंकि लोग इस समय बेहद परेशान हैं। 21 दिन और 40 दिन में लड़ाई जीत लेने के वादों पर से उनका यकीन उठ गया है और वे किसी अन्य तमाशे के लिए तैयार नहीं है। लाखों लोग बेचैनी से अपने घरों को लौटने का इंतजार कर रहे हैं। करोड़ों लोग अपनी नौकरी, रोजगार, परिवार की चिंता में हैं। ऐसे में उनका अपना हौसला टूटा हुआ है। तभी कोरोना वॉरियर्स का आभार जताने के बहाने आम लोगों में सेना के जरिए जोश भरने का प्रयास किया गया। हालांकि यह प्रयास सफल नहीं हो सका। कहीं से ऐसी तस्वीर नहीं आई कि लोग अपने घरों के सामने या छतों पर खड़े होकर फ्लाई पास्ट करने वाले या फूल बरसाने वाले हेलीकॉप्टर या विमानों को देख रहे हैं, उन्हें देख कर हाथ हिला रहे हैं या नारे लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री को लोगों की इस निराशा का अंदाजा है इसलिए लॉकडाउन के तीसरे चरण का ऐलान करके के लिए वे खुद आगे नहीं आए।

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