सामुदायिक संक्रमण हुआ या नहीं?

भारत में पिछले दो हफ्ते से लगभग हर दिन 90 हजार से ज्यादा केसेज आ रहे हैं। एक दिन सबसे ज्यादा 97 हजार केस आए। दिल्ली के सीरो सर्वेक्षण में 30 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी मिली है और मुंबई के धारावी में 57 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी मिली। राष्ट्रीय सीरो सर्वेक्षण में भी बताया गया कि मई में ही 64 लाख लोगों को संक्रमण हो चुका था। अभी देश में संक्रमितों की संख्या 55 लाख के करीब है। लेकिन अगर मई के सीरो सर्वेक्षण की तरह अभी फिर पूरे देश का सीरा सर्वेक्षण हो तो संक्रमितों की संख्या करोड़ों में होगी। तभी सवाल है कि अब सरकार यह मानेगी या नहीं कि भारत में सामुदायिक संक्रमण हो गया है?

आईसीएमआर अब तक इस बात से इनकार करता रहा है। उसका कहना है कि भारत में कोरोना का कम्युनिटी स्प्रेड नहीं हुआ है। परंतु दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने सामुदायिक संक्रमण हो जाने की बात कही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ये एक तकनीकी मामला है, जिसकी घोषणा आईसीएमआर को करनी है। यह हैरानी की बात है कि भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के ज्यादातर मामलों में कांटैक्ट ट्रेसिंग छोड़ दिया गया है। लोग संक्रमित हो रहे हैं और खुद ही घरों में आइसोलेट हो जा रहे हैं। लोग खुद ही अपील करके संपर्क में आए लोगों से जांच कराने को कहते हैं।

ज्यादातर मामलों में स्रोत का पता नहीं चल पा रहा है। तब भी अगर सरकार यह नहीं मानती है कि सामुदायिक संक्रमण हो रहा है तो इससे उसकी मंशा पर सवाल होगा। वैसे भी अब इस बात को मान लेने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि पहले की तरह अब इस बीमारी को लेकर घबराहट भी नहीं है। इसलिए ऐसा नहीं है कि सरकार सामुदायिक संक्रमण मान लेगी तो पैनिक हो जाएगा। दुनिया की निगरानी करने वाली संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन, डब्लुएचओ की चुप्पी भी सवाल खड़े करने वाली है। उसने बहुत पहले एक बार भारत में कम्युनिटी स्प्रेड की बात कही थी पर तुरंत ही उसने अपना बयान वापस ले लिया था।

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