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विपक्ष सिर्फ एक बात करे

कोरोना वायरस की महामारी के बीच विपक्षी पार्टियां एक साथ आईं और सरकार को चिट्ठी लिख कर कई सुझाव दिए। विपक्ष का साथ आना और सरकार को सुझाव दोनों अच्छी बातें हैं। पर विपक्ष अपने सुझावों में विवादित राजनीतिक मुद्दों को शामिल करके अच्छी भली पहल को बेपटरी कर दे रहा है। सोनिया गांधी से लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे तक और राहुल गांधी से लेकर प्रियंका गांधी तक अपने निजी बयानों में या प्रधानमंत्री से अपील में कह रहे हैं कि सेंट्रल विस्टा का काम रोक दिया जाए। इसी बात को 12 विपक्षी पार्टियों की ओर से लिखी गई चिट्ठी में भी  प्रमुखता से शामिल कर दिया गया।

यह एक विवादित राजनीतिक मुद्दा है, जिसे कोरोना वायरस की महामारी के पहले से विपक्षी पार्टियां उठा रही हैं। जब से सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की चर्चा शुरू हुई है तब से विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। पहले इसका विरोध इस नाम पर था कि यह प्रोजेक्ट गैरजरूरी है, पैसे की बरबादी है, पर्यावरण सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है और सौंदर्यबोध की दृष्टि से भी बेकार है। दिल्ली की आर्किटेक्चर पर काम करने वाले कई लोगों ने सौंदर्यबोध के नजरिए से सुप्रीम कोर्ट में इसका विरोध किया तो पर्यावरणवादियों ने पर्यावरण के नजरिए से विरोध किया। अब इसका  विरोध इस नाम पर हो रहा है कि कोरोना की महामारी के काल में इसका निर्माण नहीं होना चाहिए और इसका पैसा कोरोना महामारी से लड़ने में खर्च किय जाना चाहिए।

यह अच्छी बात है विपक्षी पार्टियां यह सुझाव दे रही हैं कि महामारी के बीच सेंट्रल विस्टा का प्रोजेक्ट रोक कर उसका पैसा कोरोना से लड़ने में लगाया जाए। लेकिन चूंकि विपक्षी पार्टियां खास कर कांग्रेस किसी न किसी बहाने से इस प्रोजेक्ट का विरोध करती रही है इसलिए जब उसने और 12 विपक्षी पार्टियों ने प्रधानमंत्री को दिए नौ सुझावों में इसे शामिल किया तो तत्काल उसकी नीयत का सवाल खड़ा हो गया। कांग्रेस को लग रहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक्सपोज कर रही है कि वे कोरोना महामारी में पीएम आवास और सेंट्रल विस्टा बनवा रहे हैं। इसी वजह से यह जन सरोकार की बजाय राजनीतिक सरोकार का मुद्दा बन जाता है।

कांग्रेस और विपक्ष को इस समय चाहिए कि वह सिर्फ कोरोना की टेस्टिंग, इलाज, बेड्स की उपलब्धता, दवा, वैक्सीनेशन आदि पर फोकस करे। इस समय देश के हर नागरिक को मुफ्त वैक्सीन लगाने का मुद्दा अपने आप में बहुत बड़ा है। सरकार ने वैक्सीन के लिए 35 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान बजट में किया है, जिसे संसद ने मंजूरी दी है। सो, विपक्ष इसी बात के लिए दबाव बनाए कि सरकार इस 35 हजार करोड़ रुपए को खर्च करके देश के हर नागरिक को मुफ्त में और जल्दी से जल्दी वैक्सीन लगावाए। अगर विपक्ष सिर्फ इसी बात पर एकजुट होकर जोर दे और सरकार को कठघरे में खड़ा करे तो ज्यादा बेहतर होगा और आम लोगों को उसका फायदा भी मिल सकता है। विवादित राजनीतिक मुद्दों को उठाते रहने से भाजपा और उसकी आईटी सेल को भी लोगों का ध्यान भटकाने में मदद मिलती है।

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