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ममता ने मीटिंग का मुद्दा बनाया

पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव चल रहे हैं और चुनाव के बीच कोई भी पार्टी आम लोगों से जुड़ी बातों का मुद्दा बनाने में पीछे नहीं रह रही है। तभी ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक को मुद्दा बना दिया। ध्यान रहे इस बैठक में ममता बनर्जी को नहीं बुलाया गया था क्योंकि प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्र सरकार का मानना था कि पश्चिम बंगाल कोरोना से ज्यादा प्रभावित राज्य नहीं है। हालांकि राज्य में हर दिन अब 10 हजार या उससे ज्यादा केसेज आ रहे हैं। राज्य में 26 फरवरी को चुनाव की घोषणा हुई थी उस समय से अभी तक कोरोना के केसेज में ढाई हजार फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो गई है। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल को ज्यादा प्रभावित राज्य क्यों नहीं माना यह समझ में नहीं आया।

वैसे भी प्रधानमंत्री की बैठक 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों से थी। जिन राज्यों में रोज 10 हजार से ज्यादा केसेज आ रहे हैं, ऐसे शीर्ष 10 राज्यों में पश्चिम बंगाल भी है। फिर भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को नहीं बुलाया गया। बाद में ममता बनर्जी ने कहा कि अगर उनको बुलाया जाता तो वे इस बैठक में शामिल होतीं। उन्होंने राज्य के लोगों को यह मैसेज दिया कि केंद्र सरकार कोरोना से लड़ाई में भी भेदभाव कर रही है इसलिए उनको नहीं बुलाया। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल के हिस्से का ऑक्सीजन दूसरे राज्यों को दिया जा रहा है। बंगाल से भेदभाव का मुद्दा उनके बाहरी-भीतरी के मुद्दे के भी हिसाब से भी ठीक बैठता है। तभी बैठक में नहीं बुलाए जाने को उन्होंने इतना बड़ा मुद्दा बनाया। यह अलग बात है कि इसी महीने के शुरू में प्रधानमंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना पर विचार के लिए बैठक बुलाई थी और बुलावे के बावजूद ममता बनर्जी उसमें शामिल नहीं हुई थीं। पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव ने बैठक में हिस्सा लिया था। तब उन्होंने बैठक में नहीं जाने को सही बताया था और इस बार नहीं बुलाए जाने का मुद्दा बना रही हैं।

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