दिल्ली सरकार आखिर क्या कर रही है?

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने बहुत बुरी तरह से मेस किया हुआ है। कोरोना वायरस से लड़ाई को व्यवस्थित तरीके से लड़ने की बजाय उसने इस लड़ाई में कई किस्म के कंफ्यूजन पैदा किए हैं। ऐसा पहली बार लग रहा है कि अरविंद केजरीवाल को असल में समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करना है। तभी किसी भी पूर्वी या उत्तर पूर्वी पिछड़े, गरीब राज्यों की तरह दिल्ली में भी कोरोना से मौत का आंकड़ा छिपाया जा रहा है। अस्पतालों से कुछ और आंकड़ा मिल रहा है और सरकार कुछ और बता रही है। इसी तरह सरकार ने लोकलुभावन घोषणा कर दी कि कोरोना वॉरियर्स के मरने पर एक करोड़ रुपए दिए जाएंगे लेकिन उन कोरोना वॉरियर्स के कामकाज को आसान बनाने के लिए कुछ नहीं किया गया। इस समय दिल्ली में पीपीई किट्स की भारी कमी है। कई जगह स्वास्थ्यकर्मी हाथ और पैर में पॉलिथीन की थैलियां बांध कर काम कर रहे हैं। यह कितना दुखद है कि दिल्ली पुलिस के जिस जवान की कोरोना वायरस से मौत हुई है उसे एक करोड़ मिलेंगे, लेकिन जीते जी उस जवान को इलाज नहीं मिला? उसके परिजन उसे लेकर अस्पताल-अस्पताल भटकते रहे!

नासमझी का आलम क्या है वह इस बात से समझिए कि शुरू में जब सांसद निधि पर रोक नहीं लगी थी तब पूर्वी दिल्ली के सांसद गौतम गंभीर ने अपने सांसद फंड से एक करोड़ रुपए देने को कहा तो केजरीवाल ने कहा कि पैसे की कमी नहीं है, आप पीपीई किट्स का इंतजाम कर दो। अब केजरीवाल कह रहे हैं कि पैसा ही नहीं है, वेतन कहां से देंगे। कोई केजरीवाल से पूछे कि आप कैसे आय कर अधिकारी रहे हैं कि आपको अंदाजा नहीं था कि लॉकडाउन से राजस्व खत्म हो जाएगा, जो आप दम भर रहे थे कि पैसे की कमी नहीं है?

पैसे की कमी पूरी करने के लिए शराब की बिक्री शुरू करा दी गई। केजरीवाल की सरकार उसके बाद से इसी में व्यस्त है। शराब खरीदने वालों पर फूल बरसाए जा रहे हैं या उनके लिए ई-टोकन की व्यवस्था की जा रही है और दूसरी ओर अस्पतालकर्मी वीडियो बना कर अपनी सुरक्षा के लिए उपकरण मांग रहे हैं। ऐसे ही केजरीवाल ने कह दिया कि विदेश से जो लोग लाए जा रहे हैं उन्हें क्वरैंटाइन का खर्च उनको खुद ही वहन करना होगा, सरकार नहीं देगी। सोचें, अगर उन्होंने मना कर दिया कि वह खर्च नहीं देंगे तो क्या सरकार उनको क्वरैंटाइन में नहीं रखेगी, घर जाने देगी? मजदूरों की वापसी के किराए का अलग कंफ्यूजन दिल्ली सरकार ने पैदा किया है। बिहार लौट रहे 12 सौ प्रवासी मजदूरों की टिकट का पैसा दिल्ली सरकार ने दिया। इसका खूब प्रचार किया और उधर बिहार सरकार को चिट्ठी लिख कर किराए के पैसे मांग लिए। जब बिहार ने कहा कि दिल्ली सरकार पैसे मांग रही है तो दिल्ली सरकार ने कहा कि पैसे नहीं लेंगे।

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