सरकार हाथ खड़े कर रही है!

ऐसा कई कारणों से लग रहा है कि केंद्र सरकार कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में हाथ खड़े कर रही है। पहले तो कोरोना से दोस्ती करने और उसके साथ रहना सीखने के बयान से ही जाहिर हो गया कि सरकार ने मान लिया कि वह इसे हरा नहीं सकती है। जैसा कि दुनिया के अनेक देशों ने कह दिया। ऐसे देशों ने जिनके नेताओं की छाती 56 इंच की नही है उन्होंने भी कोरोना वायरस को परास्त करके अपने लोगों को जीत का भरोसा दिलाया है, जीवन की सुरक्षा की गारंटी की है और तब लॉकडाउन हटाया है। भारत में इसका उलटा हो रहा है। डेढ़ महीने तक लोगों को लॉकडाउन में रख कर उनका आर्थिक जीवन लगभग पूरी तरह से तबाह कर देने के बाद सरकार उनके जीवन को दांव पर लगा रही है, उन्हें मरने के लिए छोड़ रही है।

इसे सरकार के दो फैसलों से समझा जा सकता है। पहले तो सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमितों को घरों में ही रखने का फैसला किया। सरकार ने तय किया कि दो पड़ोसियों की गवाही से किसी भी व्यक्ति को घर में क्वरैंटाइन किया जा सकता है। घर में क्वरैंटाइन करना बेहद घातक हो सकता है वह भी भारत जैसे देश में, जहां लोगों के घर आमतौर पर बहुत छोटे हैं। दूसरा और बड़ा फैसला यह किया गया है कि सरकार अब कोरोना वायरस के संक्रमण से गंभीर रूप से बीमार मरीजों को छोड़ कर बाकियों को अस्पताल से डिस्चार्ज करते समय उनकी जांच नहीं की जाएगी। यानी उन्हें अगर बुखार नहीं आता है तो बिना जांच के ही घर जाने को कहा जा सकता है।

बहुत संभव है कि बुखार नहीं आने पर बिना जांच के अस्पताल से छूटा व्यक्ति कोरोना वायरस का कैरियर हो। अब तक वायरस की पुष्टि करने के लिए दो बार जांच होती थी और दूसरी बार जांच निगेटिव आने पर ही लोगों को डिस्चार्ज किया जाता था। इसके बावजूद उसके घर लौटने पर आसपास के लोग उससे आशंकित रहते थे। अब कोई बिना जांच के छूट कर आएगा, तो सोचा जा सकता है कि क्या होगा। इससे यह भी लग रहा है कि टेस्ट की क्षमता का जैसा दावा किया जा रहा है वैसा है नहीं और दूसरे, सरकार इस अंदेशे में भी है कि आने वाले दिनों में मामले बढ़ेंगे, जिसके लिए अस्पतालों में बेड्स खाली रखने होंगे, तभी बिना जांच के डिस्चार्ज करने की नीति बनी है।

One thought on “सरकार हाथ खड़े कर रही है!

  1. Before last 6 years we plan a major and powerful government bt this corona pandemic shows that this govt only for rich and their own services not for all india.
    Poora are only part of voting centres not for any policy and decision where they can demand about their life and livelihood.
    Shame on mr modi and all leader’s .

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