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Monday, April 19, 2021
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टेस्टिंग घोटाले की जांच की जरूरत

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कोरोना टेस्टिंग के मामले में उत्तर प्रदेश के बाद बिहार दूसरे स्थान पर है। वहां सरकार का दावा है कि दो करोड़ 16 लाख टेस्ट हुए हैं। बिहार में कुल दो लाख 61 हजार केसेज आए, जिसमें से अभी सिर्फ 756 एक्टिव केस हैं। इस लिहाज से बड़ी आबादी वाले राज्यों में बिहार कोरोना वायरस को नियंत्रित करने वाला सबसे कामयाब राज्य रहा है। लेकिन अब उसकी हकीकत सामने आ रही है।

असल में सरकार ने राज्य में हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को डेढ़ से दो सौ टेस्ट रोज करने का टारगेट दिया है, जिसे वे किसी तरह से पूरा कर देते हैं। इसके लिए नामों की एक सूची बना दी जाती है और उनके सामने कोई भी फोन नंबर लिख दिया जाता है और रिपोर्ट निगेटिव बता दी जाती है। और ऐसा लग रहा कि टेस्टिंग किट निजी अस्पतालों को भेजी जा रही है। इसलिए इसकी जांच होनी चाहिए।

ध्यान रहे बिहार में नब्बे के दशक में हुए चारा घोटाले के समय यह सचाई सामने आई थी कि पशुओं को ढोने के लिए जिन वाहनों के नंबर दिए गए थे उनमें से बहुत से नंबर दोपहिया वाहने के थे। उसी तरह बिहार में हो रहा है। एक साथ दो-दो दर्जन नामों के आगे एक नंबर लिखा जा रहा है और वह नंबर उत्तर प्रदेश का निकल रहा है। इंडियन एक्सप्रेस ने जो जांच की है उसके मुताबिक कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तो 90 फीसदी मामलों में या तो फोन नंबर गलत निकले हैं या किसी दूसरी जगह के निकले हैं, जिन्होंने टेस्ट होने से इनकार किया है। यह पूरी आबादी को खतरे में डालने वाली बात तो है ही साथ ही इसमें करोड़ों रुपए का घोटाला भी दिख रहा है, जिसकी जांच होनी चाहिए।

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