निजी अस्पतालों पर भरोसा

दिल्ली में केंद्र और राज्य सरकार ने मिल कर छतरपुर में दस हजार बेड्स का कोविड अस्पताल बनाया। इसके अलावा एम्स से लेकर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में दूसरे मरीजों का इलाज रोक कर इन्हें कोविड के इलाज के लिए डेडिकेट किया गया। पर कोई नेता इसमें भरती होने नहीं जाता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को कोविड-19 का संक्रमण हुआ तो उनके इलाज की निगरानी जरूर एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया कर रहे हैं पर इलाज गुड़गांव के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल मेदांता में हो रहा है। यह सही है कि सुरक्षा कारणों से वे किसी सामान्य कोविड अस्पताल में भरती नहीं हो सकते हैं पर एम्स या राममनोहर लोहिया अस्पताल में तो वीआईपी वार्ड और प्राइवेट वार्ड्स भी हैं।

बहरहाल, अमित शाह अकेले अपवाद नहीं हैं। यह संयोग है कि कोरोना संक्रमित होकर वे जिस दिन मेदांता अस्पताल में भरती हुए उसी दिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल से छुट्टी हुई। तीन दिन पहले वे गंगाराम अस्पताल में भरती हुई थीं। बताया जा रहा था कि वे रूटीन चेकअप के लिए भरती हुई थीं। उनकी किसी रहस्यमयी बीमारी का इलाज अमेरिका में हुआ और रूटीन चेकअप या अस्थमा जैसी उनकी पुरानी बीमारी का इलाज गंगाराम में होता है। वे भी एम्स या राम मनोहर लोहिया या दिल्ली के दूसरे किसी सरकारी अस्पताल में नहीं जाती हैं।
उधर कर्नाटक में मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को कोरोना का संक्रमण हुआ तो वे भी इलाज के लिए बेंगलुरू के बड़े निजी अस्पताल में गए। उनका इलाज मनिपाल हॉस्पिटल में चल रहा है। भाजपा के एक और नेता, राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा को कोरोना संक्रमण हुआ था तो उनका भी इलाज गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में ही हुआ। आम आदमी पार्टी के नेता दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन कोरोना संक्रमित हुए और स्थिति गंभीर हुई तो उनको भी साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भरती कराया गया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कोरोना संक्रमण का इलाज भी भोपाल के चिरायु अस्पताल में चल रहा है। तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को कोराना का संक्रमण हुआ है और उनको होम आइसोलेशन में रखा गया है पर उनकी जांच से लेकर सेहत की निगरानी का काम भी चेन्नई के एक निजी अस्पताल कावेरी हॉस्पिटल के डॉक्टर कर रहे हैं। महाराष्ट्र में शिव सेना, कांग्रेस और एनसीपी के कई नेताओं को कोरोना का संक्रमण हुआ। सबका इलाज वहां के महंगे निजी अस्पतालों में ही हुआ। सवाल है कि सभी पार्टियों की सरकारें मिल कर सरकारी अस्पतालों को सुधारती क्यों नहीं हैं ताकि उनका इलाज भी वहां हो सके!

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