दवा भी हम बनाए, वैक्सीन भी हम बनाएंगे!

कोरोना वायरस से सारी दुनिया लड़ रही है और परेशान भी है। दुनिया भर की प्रयोगशालाओं में इसकी दवा और वैक्सीन खोजने के लिए काम चल रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन से लेकर ऑस्ट्रेलिया और चीन तक में इस पर प्रयोग हो रहे हैं। पर अभी तक कोई भी यह दावा नहीं कर पाया है कि वह कोरोना वायरस की दवा बनाने या वैक्सीन तैयार कर लेने के करीब है। सारे देश दवा और वैक्सीन के लैब ट्रायल, क्लीनिकल ट्रायल और ह्यूमन ट्रायल की समय सीमा का पालन कर रहे हैं। लेकिन भारत में कहा जा रहा है कि ये सारे ट्रायल इस समय सीमा का पालन करें कि 15 अगस्त को भारत की आजादी का दिन है और उस दिन इसको लांच करना है। भारत में घोड़े के आगे बग्घी जोती जा रही है।

दुनिया भर के देश जिस समय दवा के ट्रायल में बिजी थे और जब तक दवा तैयार नहीं हो पार्ई रही है तब तक विकल्प के रूप में दूसरी दवाओं का इस्तेमाल सुझा रहे थे उसी समय भारत में पतंजलि समूह के ब्रांड एंबेसेडर रामदेव ने दवा का ऐलान कर दिया। दुनिया भर के वैज्ञानिकों और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, डेक्सामिथासोन, फैबिपिराविर और रमेडिसिविर जैसी दवाओं के प्रयोग के नियंत्रित इस्तेमाल की मंजूरी दी है। पर रामदेव और उनके बालकृष्ण ने कहा कि उन्होंने ऐसी दवा बना ली, जिससे कोरोना के सौ फीसदी मरीज ठीक हो रहे हैं। सारी दुनिया हैरान रह गई। पर बाद में पता चला कि न तो दवा बनाने का लाइसेंस लिया गया था और न किसी दवा का ट्रायल हुआ। वह तो इम्युनिटी बूस्टर बनाया गया था, जिसे लोगों का आंख में धूल झोंकने के लिए कोरोना से मिलते-जुलते नाम से बनाया गया और दवा कह कर लांच कर दिया गया। विवाद के बाद इस पर सफाई आई और दुनिया में भारत की अच्छी किरकिरी हुई। अभी दवा का विवाद खत्म भी नहीं हुआ था कि खबर आ रही है कि भारत बायोटेक और आईसीएमआर के साझा उद्यम के तहत कोरोना की वैक्सीन आने वाली है। इसके लिए 15 अगस्त की समय सीमा भी तय कर दी गई है। एक चिट्ठी इन दिनों वायरस हो रही है, जिसमें वैक्सीन का कथित ट्रायल करने वालों को हिदायत दी गई है कि वे जल्दी ट्रायल पूरा करें ताकि इसे 15 अगस्त को लांच किया जा सके। यह तय मानें कि इस मामले में अगर जल्दी से सफाई नहीं दी गई तो दवा से भी ज्यादा किरकिरी होगी। दुनिया में सबसे सघन तैयारी और ट्रायल कर रही लैब्स, जिनका पहला ह्यूमन ट्रायल सफल रही है उनकी वैक्सीन भी अक्टूबर से पहले नहीं आनी है। वैक्सीन की खबरों ने एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया से लेकर संक्रामक रोग के रोकथाम के लिए काम करने वाले तमाम वैज्ञानिकों के लिए चौंकाने वाली थी और सब मान रहे हैं कि यह किसी हाल में संभव नहीं है कि कोई वैक्सीन 15 अगस्त तक आ जाए।

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