कोरोना के अब बेकाबू हालात

कोरोना वायरस का संक्रमण इतनी तेजी से भारत में फैल रहा है कि हालात बेकाबू हो गए हैं। केंद्र और राज्यों की सरकारें यह बात कह नहीं रही हैं पर हकीकत यह है कि हालात उनसे संभल नहीं रहे हैं और इसलिए हर दिन नए नियम लागू किए जा रहे हैं, मामलों की संख्या कम दिखाने के प्रयास हो रहे हैं, मौतों की संख्या छिपाई जा रही है, मरीजों की टेस्टिंग और डिस्चार्ज के बारे में अलग अलग नियम घोषित किए जा रहे हैं। अब भारत में कोरोना की स्थिति इस मुकाम पर पहुंच गई है, जहां इलाज और टेस्टिंग की बात नहीं हो रही है और न दवा और वैक्सीन की बात हो रही है यहां अब किसी तरह से मरीज को अस्पताल में भरती कराने की जद्दोजहद है। देश के ज्यादातर बड़े शहरों में किसी भी बीमारी से ग्रस्त मरीज के लिए अस्पताल में भरती होना नामुमकिन होता जा रहा है।
दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद से लेकर हैदराबाद और नोएडा, गुरुग्राम तक एक जैसी स्थिति है। ऐसी विरोधाभासी स्थिति बनी है, जिसमें किसी को राहत नहीं है। यह कॉमेडी ऑफ एरर की स्थिति है। अगर कोई नॉन कोविड मरीज किसी अस्पताल में इलाज के लिए जा रहा है तो अस्पताल वाले उससे कोरोना निगेटिव होने का सर्टिफिकेट मांगते हैं और कोई कोरोना का मरीज इलाज के लिए अस्पताल में जा रहा है तो उससे कोरोना पॉजिटिव का सर्टिफिकेट मांगा जा रहा है। मरीजों के लिए दोनों हासिल करना मुश्किल है क्योंकि कहीं भी टेस्टिंग में बड़ी मुश्किल आ रही है। मरीज या संभावित मरीज कहीं टेस्टिंग के लिए जा रहे हैं तब तक उसके नियम बदल गए होते हैं।

कुछ दिन पहले नियम बन गया था कि संदिग्ध लोग सरकारी या निजी लैब्स में जाकर टेस्ट करा सकते हैं। कुछ दिन यह चला इस बीच कुछ गड़बड़ियों की खबर आई और नियम बदल गया। अब लैब वाले कहते हैं कि डॉक्टर से लिखवा कर लाएं कि संदिग्ध हैं तभी जांच होगी। अगर कोरोना पॉजिटिव या निगेटिव का सर्टिफिकेट नहीं है तो मरीज चाहे बुखार में तप रहा हो, खांस रहा हो, सांस रूक रही हो पर अस्पताल वाले उसे भरती नहीं कर रहे हैं। अस्पताल के गेट पर मरीज दम तोड़ रहे हैं। दिल्ली में कोरोना के मरीज के मरने की खबर आई तो उसी दिन एक गर्भवती महिला के आठ अस्पतालों में भटकने के बाद नोएडा में मौत की खबर आई। हालात ऐसे हो गए हैं कि अस्पतालों में बेड्स नहीं हैं। जितने बिस्तर कोरोना मरीजों के लिए तैयार किए गए थे सब भर गए हैं। उससे भी बुरी खबर यह है कि अस्पतालों में इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टर, नर्सें और स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हो रहे हैं कि हर अस्पताल में स्टाफ की कमी पड़ रही है। बेड्स खाली रखने या कराने के लिए मरीजों को समय से पहले रिलीज किया जा रहा है। सरकार ने पहले ही नियम बना दिया है कि रिलीज करने से पहले दूसरा टेस्ट नहीं होगा। अब यह नियम बना दिया गया है कि कम लक्षण वाले मरीज को 24 घंटे में ही डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। सोचें, 24 घंटे में जो रिलीज होगा वह ठीक होकर रिलीज होगा या कोरोना वायरस के कैरियर की तरह रिलीज होगा?

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