सोनिया ने मीडिया को नाराज कर दिया

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी और कहा कि सरकार को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए अतिरिक्त धन की जरूरत है तो उसे ये पांच कदम उठाने चाहिएं। उन्होंने पांच कदमों में एक कदम यह सुझाया कि सरकार विज्ञापनों पर तीन साल के लिए रोक लगा दिया जाए। सवाल है कि क्या तब सोनिया गांधी और उनके सलाहकारों को इसका अंदाजा था कि उनका यह सुझाव मीडिया को नाराज कर सकता है? कहीं ऐसा तो नहीं है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने यह जानते-बूझते सरकारी विज्ञापनों पर रोक लगाने का सुझाव दिया?

बहरहाल, सोनिया गांधी के सुझाव ने मीडिया को नाराज कर दिया है। नेशनल ब्रॉडकास्ट एसोसिएशन, एनबीए ने इस पर नाराजगी जाहिर की है। ध्यान रहे देश में पहले से चल रहे मंदी के हालात की वजह से कॉमर्शियल विज्ञापनों में पहले से कमी आई हुई है। कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन के कारण कंपनियों के विज्ञापन पूरी तरह से बंद हैं और अगले कई महीनों तक इसके असर की वजह से विज्ञापनों में कमी रहने वाली है। ऐसे में मीडिया कंपनियों का काम सिर्फ सरकारी विज्ञापनों से चल रहा है।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेताओं को इस हालात की जानकारी है और इसके बावजूद ऐसा सुझाव सोनिया गांधी ने दिया तो इसका कारण यह है कि मीडिया में पहले से ही कांग्रेस के प्रति पूर्वाग्रह दिखता है। ज्यादातर चैनल दिन भर सरकार के गुणगान में लगे रहते हैं और कांग्रेस के छह साल से सत्ता से बाहर होने के बावजूद उसी के ऊपर हमला होता रहता है। तभी कांग्रेस नेता यह मान रहे हैं कि उनको मीडिया का सपोर्ट वैसे भी नहीं मिलता है इसलिए क्यों नहीं ऐसा सुझाव दिया जाए, जिससे सरकार और मीडिया दोनों एक्सपोज हों।

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