सिर्फ दिल्ली के अधिकारियों की जांच क्यों?

केंद्र सरकार ने दिल्ली के अधिकारियों पर कार्रवाई की है। दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है और दो अन्य अधिकारियों को नोटिस दिया गया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव रेणु शर्मा और वित्त विभाग के प्रधान सचिव राजीव वर्मा को निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक दूसरे अतिरिक्त मुख्य सचिव सत्य गोपाल और सीलमपुर के एसडीएम अजय अरोड़ा को नोटिस भेजा गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी नोट में कहा गया है कि ये अधिकारी देश में लागू लॉकडाउन के आदेश का पालन नहीं करा सके, अपनी ड्यूटी में विफल रहे और इस वजह से हजारों की संख्या में मजदूर दिल्ली से पलायन करने लगे। दिल्ली-यूपी बोर्डर पर हजारों मजदूरों के इकट्ठा होने का ठीकरा इन अधिकारियों पर फोड़ा गया है।

सवाल है कि ऐसी कार्रवाई सिर्फ दिल्ली के अधिकारियों पर क्यों हुई है? हरियाणा के कई जिलों से प्रवासी मजदूरों ने पलायन किया है। हरियाणा के सोनीपत से ही पलायन कर रहे आठ मजदूर एक गाड़ी से कुचले गए, जिनमें से पांच लोगों की मौत हुई। हरियाणा के शहरों- गुड़गांव, मानेसर, फरीदाबाद, कोंडली, सोनीपत, पानीपत आदि से बड़ी संख्या में मजदूरों ने पलायन किया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अपील के बावजूद मजदूर नहीं रूके। हरियाणा से पलायन इतना भारी है वहां खेत में खड़ी फसल काटने के लिए मजदूर नहीं हैं, किसान परेशान हो रहे हैं। पर वहां के किसी अधिकारी के ऊपर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

कांग्रेस शासित राजस्थान और पंजाब से, शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी के शासन वाले महाराष्ट्र और कम्युनिस्ट पार्टी के शासन वाले केरल से भी हजारों मजदूरों का पलायन हुआ है। जिस तरह से दिल्ली-यूपी सीमा पर लगे जुटे थे उसी तरह से केरल के कोट्टायम में हजारों लोग इकट्ठा हो गए। वहां भी इससे लोगों की जान जोखिम में पड़ी पर वहां के अधिकारियों पर कार्रवाई के बारे में नहीं सोचा गया। संकट के इस समय में भी केंद्र सरकार ने अपनी सारी नाराजगी दिल्ली की सरकार के लिए बचा कर रखी है।

यह भी खबर आई है कि दिल्ली और देश के कई हवाईअड्डों से लोग बिना जांच के निकल गए। सऊदी अरब और दुबई से लौट रहे लोगों की जांच मार्च के मध्य तक नहीं हुई। केरल में कोरोना वायरस के ज्यादातर मरीज वहीं हैं, जो इन देशों से लौटे हैं। पूरे देश को इस तरह की लापरवाही से खतरे में डालने के लिए किस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हो रही है? आज भारत के ज्यादातर अस्पतालों में डॉक्टर और दूसरे स्वास्थ्यकर्मी बिना पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट, पीपीई के काम कर रहे हैं। भारत के पास दो महीने से ज्यादा समय था पीपीई के ऑर्डर देकर मंगाने का, पर नहीं मंगाया गया। इससे डॉक्टरों, नर्सों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों का जीवन खतरे में पड़ा है, उसके लिए किसकी जिम्मेदारी तय की जा रही है?

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