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राजरंग| नया इंडिया|

बैंक तो आरबीआई में पैसा जमा कर रहे हैं

केंद्र सरकार लोगों को ज्यादा से ज्यादा कर्ज लेने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। यहां तक कि वह खुद गारंटर बनने को तैयार है ताकि छोटे व मझोले उद्यम वाले लोग कर्ज ले सकें। केंद्रीय वित्त मंत्री ने कोरोना वायरस के नाम पर जारी पैकेज में उनके लिए तीन लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। यानी बैंक इतना लोन एमएसएमई सेक्टर को दे सकते हैं और इसके लिए उन्हें कोई गारंटी लेने की जरूरत नहीं है क्योंकि सरकार खुद गारंटर है। पर बैंक इसकी तैयारी नहीं कर रहे हैं। वे कर्ज देने को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं। उनको पता है कि बिना गारंटी का कर्ज डिफॉल्ट होगा तो उसकी जवाबदेही सरकार पर नहीं, बल्कि बैंक पर आएगी और उसके अधिकारी नपेंगे।

कारोबारी भी इस बात को जानते हैं कि जब गारंटी देने पर बैंक कर्ज नहीं दे रहे हैं तो बिना गारंटी के कौन कर्ज देगा। बैंक भी इस बात को समझ रहे हैं कि ऐसे समय में उसके पास कर्ज लेने वो ही आएगा, जिसे कर्ज लेकर खा जाना है। असली उद्यमी इस समय कर्ज लेने के बारे में सोच भी नहीं सकता है। तभी कारोबारी बैंक अपना पैसा रिजर्व बैंक के पास जमा कर रहे हैं। खबर है कि बैंकों ने आठ लाख करोड़ रुपए आरबीआई में जमा कराए हैं। सोचें, इस समय सरकार को पैसे लेकर आम लोगों के बीच बांटना है और उसके लिए सरकार के पैस पैसे नहीं है और उधर बैंक आरबीआई में पैसा जमा कर रहे हैं।

इससे भी हैरान करने वाली बात यह है कि इस साल अप्रैल में अकेले भारतीय स्टेट बैंक में सवा लाख करोड़ रुपए जमा हुए हैं। पिछले साल यानी 2019 के अप्रैल में स्टेट बैंक में कुल 14 हजार करोड़ रुपए जमा हुए थे और इस समय एक लाख 25 हजार करोड़ रुपए जमा हुए हैं। सोचें, अप्रैल में लॉकडाउन के बीच एक बैंक में सवा लाख करोड़ रुपए जमा हुए हैं। बैंक के चेयरमैन ने कहा है कि इसमें ज्यादातर पैसा केंद्र सरकार के विभागों और राज्यों का है। लोगों को राहत देने के लिए तो सरकार कोरोना के नाम पर एडीबी और वर्ल्ड बैंक से कर्ज ले रही है और अपना पैसा बैंकों में जमा कर रही है।

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