कारोबारियों को अभी राहत नहीं

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच देश के कारोबारियों, उद्यमियों को अभी तत्काल राहत नहीं मिलने जा रही है। जानकार सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार दूसरे आर्थिक पैकज की तैयारियों में लगी है पर वह भी कोरोना वायरस से प्रभावित हो रहे इलाकों और नागरिकों के लिए होगी। बताया जा रहा है कि एक लाख करोड़ रुपए का यह पैकेज हो सकता है। पिछली बार केंद्र सरकार ने एक लाख 70 हजार करोड़ रुपए का पैकेज घोषित किया था।

ध्यान रहे दुनिया कई संस्थाएं आम लोगों, गरीबों और वंचितों पर कोरोना वायरस के संक्रमण की ज्यादा मार पड़ने की आशंका जता रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ से जुड़े अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन, आईएलओ के आकलन के मुताबिक भारत में 40 करोड़ लोग गरीबी के दुष्चक्र में फंस सकते हैं। घरेलू स्तर पर इस तरह की रिपोर्ट है, दिहाड़ी मजदूर और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के सामने नौकरी के साथ साथ खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। सरकार को असली चिंता वायरस संक्रमण के दौर में इस समूह को जरूरी चीजें उपलब्ध कराने की हैं।

तभी कहा जा रहा है कि दूसरा पैकेज भी गरीब, वंचित, हाशिए के लोगों, किसान और कुछ निम्न मध्य वर्ग के लोगों को ध्यान में रख कर घोषित होगा। यह भी कहा जा रहा है कि सरकार मेडिकल पैकेज की भी घोषणा कर सकती है। प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन की जानकारी देते समय बताया था कि 15 हजार करोड़ रुपए इस मद में दिए गए हैं। उसे बढ़ाया जा सकता है। सरकार ने राज्यों को भी साढ़े 17 हजार करोड़ रुपए दिए हैं और जीएसटी के सेस मद का पैसा भी जारी कर दिया है।

जानकारों का कहना है कि सरकार इस समय उद्यमियों, कारोबारियों के लिए पैकेज नहीं घोषित करेगी। लेकिन उसकी तैयारी करके रखेगी और लॉकडाउन खत्म होने के बाद उसका ऐलान किया जाएगा। सरकार वायरस का संक्रमण खत्म होने तक इंतजार करेगी। उस समय कंपनियों को बड़ी राहत की जरूरत होगी। खासतौर से छोटी और सबसे ज्यादा प्रभावित कंपनियों को। बताया जा रहा है कि लघु व मझोले उद्योग यानी एमएसएमई की जरूरतों को ध्यान में रख कर पैकेज तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा होस्पिटलिटी उद्योग यानी होटल, टूरिज्म, ट्रैवल आदि से जुड़ी कंपनियों के लिए सरकार पोस्ट लॉकडाउन प्लान तैयार कर रही है।

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