मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल बनाना चुनौती

मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो रहा है। कोरोना वायरस की वजह से यह रूका हुआ है। हालांकि यह मंत्रिमंडल विस्तार नहीं करने की आखिरी वजह से हो सकती है। जिस तरह कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच मुख्यमंत्री ने शपथ ली या बहुमत साबित किया उसी तरह एक-एक करके मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। पर कोरोना के बहाने मंत्रिमंडल विस्तार रूका हुआ है और इस वजह से मुख्यमंत्री को भी राहत मिली हुई है। असल में राज्य में हर मंत्री पद के लिए तीन-तीन दावेदार हैं। तभी मंत्रिमंडल का विस्तार भाजपा नेतृत्व के लिए बड़ा सिरदर्द है।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस और विधानसभा से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुए तमाम विधायक मंत्री पद के दावेदार हैं। उन्होंने कर्नाटक में देखा है। देर से ही सही पर भाजपा ने कांग्रेस छोड़ने वाले सारे नेताओं को टिकट भी दी और उनमें से ज्यादातर को मंत्री भी बनाया। तभी मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस छोड़ कर आने वाले नेता मंत्री बनने की चाह लिए हुए हैं। उनके अलावा जो लोग 16 महीने पहले तक शिवराज सरकार में शामिल थे, उनमें से भी जो जीते हैं वे मंत्री पद के दावेदार हैं। तीसरा दावा नए नेताओं का है, जो पहले मंत्री नहीं बन पाए थे लेकिन कई बार से चुनाव जीत रहे हैं।

असल में यह पिछले कुछ समय का ट्रेंड बन गया है कि अकेले मुख्यमंत्री भी कुछ दिन तक सरकार चला सकते हैं। या मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री भी हों तो काम चलेगा। कर्नाटक, हरियाणा, झारखंड आदि राज्यों में यह देखने को मिला है। उसी तरह से महाराष्ट्र में तीन हफ्ते से अकेले मुख्यमंत्री सब कुछ संभाल रहे हैं। वैसे अब मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा शुरू हो गई है और हो सकता है कि कुछ लोगों को शामिल किया जाए पर कोरोना की वजह से मुख्यमंत्री को राहत मिली हुई है नहीं तो उनको बड़ा राजनीतिक प्रबंधन करना होगा।

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