अब क्या अधिकारियों, विधायकों की बारी?

राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपालों और सांसदों के वेतन में कटौती और सांसद निधि रोकने के फैसले के बाद क्या अधिकारियों और विधायकों की बारी आ सकती है? सोशल मीडिया में इसे लेकर खूब अटकलें लगाई जाने लगीं हैं और मजाक वाले मीम भी बनने लगे हैं। जैसे यह तंज खूब वायरल हुआ ‘कि सीधे 30 फीसदी की कटौती से ऐसा लग रहा है कि वेतन सांसदों की कमाई का एकमात्र जरिया नहीं है’। ऐसी कई रोचक बातें चर्चा में हैं। इन्हें में एक बात यह भी है कि क्या अब राज्यों में सरकारें विधायकों के वेतन में कटौती का फैसला कर सकती हैं और क्षेत्र के विकास के लिए मिलने वाली विधायक निधि को रोका जा सकता है?

संभव है कि केंद्र सरकार की देखा-देखी राज्य सरकारें भी ऐसी पहल करें। ध्यान रहे कई राज्यों में विधायकों को एक से लेकर तीन-चार करोड़ रुपए तक की निधि मिलती है, जिससे वे स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे काम कराते हैं। सांसद और विधायक इस निधि के जरिए अपने समर्थकों और अपने समर्थन वाले इलाकों के लोगों को संतुष्ट करते हैं। बहरहाल, यह भी अटकल है कि केंद्र और राज्यों में बड़े अधिकारियों का वेतन भी सांसदों, विधायकों से कम नहीं है, बल्कि ज्यादा ही है। सांसदों, विधायकों की तरह उन्हें भी सरकार रहने को घर देती है और सारी सुविधाएं भी देती हैं। तो क्या उनके वेतन में भी कटौती हो सकती है? कई जानकार यह भी मान रहे हैं कि एक बार यह प्रक्रिया शुरू हो गई तो कहां रूकेगी यह नहीं कहा जा सकता।

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