कहीं इलाज ही तो मर्ज की वजह नहीं? - Naya India
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कहीं इलाज ही तो मर्ज की वजह नहीं?

कोरोना वायरस के इलाज में देश के झोलाछाप विशेषज्ञों ने एक अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है। जिस दवा से मरीजों का इलाज किया जा रहा है वह दवा ही उनके लिए जानलेवा बन जा रही है। तभी कई विशेषज्ञों ने सरकारी झोलाछाप विशेषज्ञों की समझदारी पर सवाल उठाया है। यह कहा जा रहा है कि देश में ब्लैक फंगस की जो नई महामारी फैली है वह मरीजों के गलत इलाज और खराब चिकित्सा उपकरणों की वजह से है। हालांकि इस पर अभी शोध चल रहे हैं पर यह संकेत मिल रहा है कि इलाज ही बीमारी बढ़ाने का कारण है।

कहा जा रहा है कि वायरस की दूसरी लहर शुरू होने और ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचने के बाद बहुत खराब क्वालिटी के ऑक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति हुई। कायदे से ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखे गए मरीज को 95 फीसदी शुद्ध ऑक्सीजन मिलना चाहिए पर कहा जा रहा है कि खराब मशीनों से उन्हें प्रदूषित या कम क्वालिटी की ऑक्सीजन मिली। ऊपर से ऑक्सीजन की नमी बरकरार रखने के लिए जिस पानी का इस्तेमाल किया गया वह भी कई जगह प्रदूषित था और उसी की वजह से ज्यादातर लोगों में ब्लैक फंगस की बीमारी हुई है।

इसी तरह स्टेरॉयड के ज्यादा इस्तेमाल को भी ब्लैक फंगस का एक कारण माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि स्टेरॉयड का ज्यादा इस्तेमाल होने से मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हुई और उन्हें इस नई बीमारी ने पकड़ा। कोरोना मरीजों की मौत का एक कारण भी स्टेरॉयड के ज्यादा इस्तेमाल को माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि उससे मरीजों में खून के थक्के जमने की शिकायत हुई, जिससे दिल का दौरा पड़ने या ब्रेन डेड होने की घटनाएं हुईं।

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