कांग्रेस नेताओं के बीच ट्विटर वार

मंगलवार को दिल्ली विधानसभा का चुनाव नतीजा आते ही पार्टी के नेताओं के बीच ट्विटर पर और मीडिया में भी जुबानी जंग छिड़ गई। ऐसा लगा, जैसे पार्टी के सारे नेता इस मौके के लिए तैयार बैठे हों। वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने आम आदमी पार्टी की जीत की तारीफ की तो कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने बहुत तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस ने इसी तरह राज्यों में भाजपा को हराने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय पार्टियों को आउटसोर्स कर दी है तो क्या प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को अपनी दुकान बंद कर देनी चाहिए। कांग्रेस को आत्मचिंतन करना चाहिए, यह नसीहत कई नेताओं ने दी।

इसके बाद शाम होते होते दिवंगत शीला दीक्षित को लेकर विवाद शुरू हो गया। कई बरसों से दिल्ली के प्रभारी पीसी चाको ने कहा कि कांग्रेस का वोट शेयर उसी समय कम होना शुरू हो गया था, जब शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थीं। इस बयान के लिए उनकी बड़ी आलोचना हुई। कांग्रेस के लगभग सभी नेताओं ने उनके बयान पर आपत्ति जताते हुए ट्विट किया, जिसके बाद उन्होंने सफाई भी दी। पर सबसे अच्छी प्रतिक्रिया शीला दीक्षित के राजनीतिक सचिव रहे पवन खेड़ा की थी। उन्होंने बताया कि 2013 में जब कांग्रेस शीला दीक्षित की कमान में लड़ी थी तब उसे 22 फीसदी वोट मिला था। 2015 के चुनाव में शीला दीक्षित बाहर हो गईं तो पार्टी का वोट शेयर नौ फीसदी पर आ गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर शीला दीक्षित को कमान दी तो वोट शेयर 22 फीसदी पहुंच गया और इस बार उनके गुजर जाने के बाद पार्टी ने चुनाव लड़ा तो वोट शेयर चार फीसदी पर आ गया।

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