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Wednesday, May 12, 2021
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दिल्ली के बिल पर कृषि बिल की कहानी!

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दिल्ली के चुने हुए मुख्यमंत्री के अधिकार छीन कर उप राज्यपाल को ही दिल्ली सरकार बनाने के लिए लाए गए विधेयक, जीएनसीटीडी अमेंडमेंट बिल 2021 को पास कराने में भी केंद्र सरकार ने कुछ कुछ वैसा ही किया जैसा कृषि बिल के साथ किया गया था। लोकसभा में ध्वनि मत से पास कराने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यसभा में भी इसे ध्वनि मत से ही पास कराया। फर्क इतना था कि कृषि विधेयकों के समय विपक्ष के सांसद वोटिंग की मांग कर रहे थे और सदन में हंगामा कर रहे थे लेकिन इस बार मांग करते करते थक कर सदन से वाकआउट कर दिया और उसके बाद सरकार ने बिल पास करा लिया।

कृषि कानूनों की तरह ही यह भी क्लासिक मामला है कि एक दर्जन से ज्यादा विपक्षी पार्टियों के एकजुट होने और बिल का विरोध करने के बावजूद सरकार इसे पास कराने में कामयाब रही। उच्च सदन में जिन क्षेत्रीय पार्टियों के पास ज्यादा सांसद हैं लगभग उन सभी ने बिल का विरोध किया। यहां तक कि सरकार का समर्थन करने वाली पार्टियों बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस ने भी बिल का विरोध किया। बाकी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए में शामिल दलों ने विरोध किया और तृणमूल कांग्रेस ने भी इसका विरोध किया। इस तरह विरोध करने वालों सांसदों की संख्या स्पष्ट रूप से ज्यादा थी।

इसके बावजूद केंद्र सरकार ने उनकी बातों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी। बिल का विरोध कर रही पार्टियां इस बिल को संसद की सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग कर रहे थे। ध्यान रहे पहले भी बिल गृह मामलों की संसदीय समिति के पास नहीं गया था। इसलिए पेश होने के बाद इसे प्रवर समिति में भेजने की मांग हो रही थी। पर लगता है कि सरकार ने यह ठान लिया है कि किसी भी बिल को स्थायी या प्रवर समिति के पास नहीं भेजेंगे। यह अलग बात है कि संसदीय समितियों में सरकार का ही बहुमत है फिर भी लगता है कि विधेयकों को संसदीय समिति में भेजना सरकार को अपना अपमान लगता है।

तभी ध्वनि मत से बिल पास कराने वाला रास्ता अपनाया गया है। लोकसभा में तो सबको पता है कि सरकार के पास बहुमत है इसलिए वहां ध्वनि मत से बिल पास होना समझ में आता है। लेकिन राज्यसभा में सरकार अल्पमत में है, इसके बावजूद वोटिंग कराने या विपक्ष की बात सुन कर बिल को संसदीय समितियों के पास भेजने की बजाय सरकार जोर-जबरदस्ती उन्हें पास कराती रही है। कृषि कानूनों को भी ऐसे ही पास कराया गया था।

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