• डाउनलोड ऐप
Thursday, May 6, 2021
No menu items!
spot_img

विधायी कामों के लिए समय नहीं

Must Read

दिल्ली के चुने हुए मुख्यमंत्री का अधिकार छीन कर उप राज्यपाल के तौर पर काम कर रहे रिटायर ‘बाबू’ को मुख्यमंत्री के अधिकार देने वाला कानून केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से लाया गया था। यह इतना जरूरी था कि पांच राज्यों में चल रहे चुनाव के बीच इसे पेश किया गया और आनन-फानन में इसे पास कराया गया। केंद्र सरकार इसे इतना जरूरी मान रही थी कि उसने उसे संसदीय समिति के पास भेजना भी जरूरी नहीं समझा। इसके बावजूद केंद्रीय गृह मंत्री को इसकी बहस में शामिल होने का समय नहीं था। न तो प्रधानमंत्री इस बिल पर हुई बहस के समय सदन में मौजूद रहे और न गृह मंत्री। जिस समय प्रतिष्ठा का सवाल बना कर और व्हीप जारी केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बिल पर बहस कराई उस समय भी प्रधानमंत्री और गृह मंत्री चुनाव प्रचार कर रहे थे।

राज्यसभा में बिल पर बहस के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी नेता ममता बनर्जी ने कहा कि घोषणापत्र नहीं, संविधान ज्यादा अहम है और इसलिए तृणमूल कांग्रेस के 10 सांसद प्रचार छोड़ कर इस पर चर्चा में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंचे। लेकिन जिस समय यह चर्चा हो रही थी उस समय प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल व असम में और अमित शाह केरल में चुनाव प्रचार कर रहे थे। बिल पेश करने और चर्चा का जवाब देने का जिम्मा जूनियर मंत्री जी किशन रेड्डी को सौंपा गया था। इससे भी संसदीय परंपरा और व्यवस्था के प्रति सरकार का नजरिया समझ में आता है।

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest News

मशहूर एक्ट्रेस Abhilasha Patil ने कोरोना से हारी जंग, कई बाॅलीवुड फिल्मों में किया दमदार अभिनय

नई दिल्ली। कोरोना के कोहराम के बीच हिंदी और मराठी सिनेमा जगत से एक बुरी खबर है. कोरोना संक्रमण...

More Articles Like This