जस्टिस मुरलीधर के निशाने पर आ गई पुलिस

यह महज संयोग है कि बुधवार को दिल्ली के दंगों का मामला जब दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए आया तो वह जस्टिस डॉक्टर एस मुरलीधर की कोर्ट में आ गया। जस्टिस मुरलीधर वरीयता क्रम में तीसरे स्थान पर हैं। चूंकि चीफ जस्टिस डीएन पटेल सोमवार से छुट्टी पर थे और दूसरे वरिष्ठ जज जस्टिस जीएस सिस्तानी भी बुधवार को छुट्टी पर थे। सो, तीसरे सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस मुरलीधर की कोर्ट में मामला आ गया। सुनवाई के दौरान ऐसा लगा कि सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता किसी तरह से सुनवाई टलवाना चाहते थे। वे चाहते थे कि सुनवाई स्थगित हो जाए ताकि गुरुवार से काम पर लौट रहे चीफ जस्टिस मामले को सुनें। पर कामयाबी नहीं मिली। जस्टिस मुरलीधर ने तीन घंटे तक सुनवाई की। भाजपा नेताओं के वीडियो क्लिप अदालत में चलवा कर सुने और सबके ऊपर मुकदमा करने का आदेश दिया। उन्होंने सॉलिसीटर जनरल की एक बात नहीं सुनी। कई बार दिल्ली पुलिस और सरकार को फटकार लगाई।

दिल्ली हाई कोर्ट में यह उनकी आखिरी सुनवाई थी क्योंकि उनका तबादला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में हो गया है। भारत सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। इससे पहले जब कॉलेजियम ने उनके तबादले का फैसला किया तो दिल्ली के वकीलों में इसका भारी विरोध हुआ। इसके बावजूद उनका तबादला हो गया। अनेक वकीलों ने इसके विरोध में 20 फरवरी से कामकाज बंद करने की अपील भी की थी। बहरहाल, अब सरकार ने उनके तबादले की अधिसूचना जारी कर दी है। पर जाते जाते उन्होंने चुनाव के समय दिए गए भड़काऊ भाषणों से लेकर मंगलवार की शाम तक दिए भाषणों पर एफआईआर करने और जांच करने का जरूरी आदेश दे दिया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares