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पंजाब और उत्तराखंड का फर्क

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में एक नया दांव चला है। उन्होंने एक मोबाइल नंबर जारी करके पंजाब के लोगों से पूछा है कि विधानसभा चुनाव में किसको मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाया जाए। उन्होंने ऐसा क्यों किया, यह समझना जरा मुश्किल है। लेकिन उन्होंने सिर्फ लोगों से पूछा ही नहीं, बल्कि इसको एक सैद्धांतिक जामा भी पहनाया। उन्होंने कहा कि बंद कमरे में मुख्यमंत्री तय करने की परंपरा बंद होनी चाहिए। सोचें, केजरीवाल ने कई महीने पहले कहा था कि पंजाब में वे सीएम का चेहरा पेश करेंगे। वे बार बार भाजपा, कांग्रेस से पूछते थे कि आपका दुल्हा कौन है। जब उन्होंने महीनों पहले तय किया था कि सीएम का चेहरा पेश करेंगे तो लोगों से पूछने के लिए चुनाव की घोषणा का इंतजार क्यों कर रहे थे? Difference Punjab and Uttarakhand

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एक बड़ा सवाल यह भी है कि उत्तराखंड में उन्होंने कैसे रिटायर सैन्य अधिकारी अजय कोठियाल को सीएम का दावेदार बनाया? वहां क्यों नहीं उत्तराखंड के लोगों से पूछा गया कि आम आदमी पार्टी को किस नेता को सीएम का दावेदार बनाना चाहिए? वहां तो सीएम का दावेदार बंद कमरे में तय कर लिया और पंजाब में लोगों से पूछा जा रहा है! केजरीवाल ने पहले ही कहा हुआ है कि उनकी सरकार बनी तो कोई सिख ही सीएम बनेगा। सोचें, अगर पंजाब के लोगों ने किसी गैर सिख पर मुहर लगा दी तो क्या होगा? या क्या केजरीवाल को पता है कि पंजाब के लोग किसी सिख के नाम पर ही मुहर लगाएंगे? वैसे दिल्ली में भी जितनी बार आप ने जनमत संग्रह  कराया है, हर बार नतीजे उसके नेता के मनमाफिक ही आए हैं।

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