मोदी और शाह की मुश्किल? - Naya India
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मोदी और शाह की मुश्किल?

भाजपा आलाकमान असम के मुख्यमंत्री पद का फैसला नहीं कर पा रही है। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल और हिमंता बिस्वा सरमा दोनों को दिल्ली बुला कर बात की है। पिछले सात साल में यह दूसरा मौका है, जब नरेंद्र मोदी और अमित शाह को मुख्यमंत्री तय करने में मुश्किल आ रही है और कई समीकरणों का ख्याल रखना पड़ रहा है। इससे पहले दोनों ने जिसको चाह उसको कमान दी। झारखंड में रघुवर दास से लेकर हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर और हिमाचल प्रदेश में जयराम ठाकुर से लेकर उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला दोनों नेताओं ने चुटकियों में किया और पार्टी में किसी तरह से चूं कि आवाज नहीं आई। पहली बार दोनों को तब दिक्कत आई जब त्रिवेंद्र सिंह रावत को बदलना पड़ा। पार्टी के विधायकों के दबाव में दोनों को अपने चुने हुए मुख्यमंत्री को हटाना पड़ा।

अब दूसरी बार ऐसा हो रहा है कि मोदी और शाह को मुख्यमंत्री तय करने में इतनी दिक्कत आ रही है। उनको हिमंता बिस्वा सरमा की ताकत का अंदाजा है और दोनों उनकी उपयोगिता भी जानते हैं। लेकिन मुश्किल यह है कि उनकी पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ या भाजपा वाली नहीं है। वे कांग्रेस पार्टी में थे और छह साल पहले ही भाजपा में शामिल हुए हैं। ऐसे नेता को मुख्यमंत्री बनाना भाजपा की नीति में फिट नहीं बैठता है। तभी कहा जा रहा है कि दोनों सोनोवाल को ही मुख्यमंत्री बनाए रखना चाहते हैं लेकिन हिमंता को नाराज भी नहीं करना चाहते हैं क्योंकि समूचे पूर्वोत्तर में वे भाजपा के लिए बहुत उपयोगी साबित हुए हैं। उत्तराखंड के बाद अब असम और त्रिपुरा की राजनीति भी मोदी और शाह के एकछत्र राज के कमजोर पड़ने का संकेत है।

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