संघीय मोर्चे से क्या भाजपा को फायदा? - Naya India
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संघीय मोर्चे से क्या भाजपा को फायदा?

भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस पार्टी को छोड़ कर अगर संघीय मोर्चा बनता है तो क्या भाजपा को उसका फायदा मिलेगा? यह लाख टके का सवाल है, जिसका सबसे बेहतर जवाब चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर दे सकते हैं। उनके पास आंकड़े हैं और इसलिए उनको पता होगा कि किसी तीसरे पक्ष की मौजूदगी से भाजपा को कितना फायदा होता है। असम का नतीजा इसकी मिसाल है, जहां दो क्षेत्रीय पार्टियों- असम जातीय परिषद और रायजोर दल को मिले वोट की वजह से भाजपा चुनाव जीती है। ध्यान रहे असम में भाजपा और कांग्रेस गठबंधन के वोट में एक फीसदी का ही अंतर है। इतने से ही दोनों के बीच 40 से ज्यादा सीटों का अंतर हो गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दो क्षेत्रीय पार्टियों और अन्य ने मिल कर 13 फीसदी से ज्यादा वोट लिए। कम से कम राज्यों के चुनाव में भाजपा को हमेशा वोट काटने वाली एक पार्टी चाहिए होती है, चुनाव जीतने के लिए।

सो, अगर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के मुकाबले एक संघीय मोर्चा चुनाव में उतरता है तो उसका फायदा भाजपा को हो सकता है। यह संघीय मोर्चा भाजपा विरोधी वोट ही लेगा। इसका मतलब है कि भाजपा विरोधी वोट इस संघीय मोर्चे और कांग्रेस में बंटेगा। ऐसे में अगर भाजपा का वोट कुछ कम भी होता है तो सीटों पर असर नहीं होगा। इसलिए प्रशांत किशोर या संघीय मोर्चा बनाने का प्रयास कर रहे नेताओं को समझना होगा कि भाजपा को हराने के लिए सिर्फ मोर्चा बनाना काफी नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक तालमेल या सीधा गठबंधन कांग्रेस से भी करना होगा।

दूसरी बात यह है कि जिन राज्यों के नेताओं को लेकर संघीय मोर्चा बनना है वहां भाजपा का आधार नहीं है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में भाजपा के कुल सांसदों की संख्या 25 भी नहीं है। तीसरे, संघीय मोर्चे में शामिल होने वाली एक पार्टी का दूसरे राज्य में कोई आधार नहीं है। इसलिए धारणा को प्रभावित करने के अलावा ये पार्टियां जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं डाल पाएंगी। जैसे न जगन मोहन रेड्डी बंगाल में कुछ कर सकते हैं और ममता आंध्र प्रदेश में कुछ कर सकती है। संघीय मोर्चे या तीसरे मोर्चे की राजनीति करने वालों को इन बातों का ध्यान रखना होगा।

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