चुनाव आयोग की अलग ही चिंता - Naya India
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चुनाव आयोग की अलग ही चिंता

केंद्रीय चुनाव आयोग ने खुद ही अपनी प्रतिष्ठा मिट्टी में मिलाई है। इसके लिए अदालत या मीडिया को दोष देने का कोई मतलब नहीं है। पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने जिस तरह का आचरण किया है वह ऐतिहासिक गिरावट की मिसाल है। हालांकि मद्रास हाई कोर्ट ने उसके पूर्वाग्रह को लेकर कुछ नहीं कहा पर कोरोना वायरस की गंभीरता को दरकिनार करके कई चरणों में चुनाव कराने और चुनाव प्रचार के दौरान दिशा-निर्देशों के खुलेआम उल्लंघन पर आंखें मूंदे रखने पर तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि क्यों नहीं आयोग के अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाया जाए।

चुनाव आयोग अदालत की इस टिप्पणी से उतना आहत नहीं हुआ, जितना इसके मीडिया में छपने और दिखाए जाने से हुआ। तभी आयोग ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका देकर कहा कि मीडिया को अदालती टिप्पणियों के प्रसारण और प्रकाशन से रोका जाए। इस पर भी अदालत ने चुनाव आयोग को फटकार लगाई और याचिका खारिज कर दी। बहरहाल, ऐसा नहीं है कि चुनाव आयोग अदालती टिप्पणी से सुधर गया है। उसने वोटों की गिनती के दिन के लिए नए दिशा-निर्देश बनाए तो पार्टियों से कहा कि उम्मीदवार को तभी मतगणना केंद्र में जाने की मंजूरी मिलेगी, जब दोनों डोज वैक्सीन लगी हो और आरटी-पीसीआर टेस्ट निगेटिव हो। मतगणना एजेंट्स के लिए भी यही नियम बनाया गया। पर मतगणना करने वाले कर्मचारियों औऱ सुरक्षा बलों को इससे छूट दे दी गई। सवाल है कि काउंटिंग एजेंट्स और कैंडीडेट्स के लिए इतना सख्त नियम और मतगणना करने वालों और सुरक्षा बलों को पूरी तरह से छूट देने के नियम का क्या मतलब है?

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