बिहार की पार्टियों को चुनाव आयोग की चिट्ठी

बिहार में विधानसभा का चुनाव होगा या नहीं, इसे लेकर अभी संशय है। हालांकि चुनाव आयोग से लेकर राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन की कम से कम दो पार्टियां चुनाव की तैयारी में लग गई हैं। इसी सिलसिले में चुनाव आयोग ने बिहार में पंजीकृत सभी राष्ट्रीय व क्षेत्रीय पार्टियों को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें उनसे अपील की गई है कि वे दागी छवि वाले नेताओं को टिकट न दें। चुनाव आयोग को भी पता है कि उसकी इस अपील का कोई मतलब नहीं है क्योंकि बिहार की चाहे कोई भी पार्टी हो अगर वह दागी नेताओं को टिकट नहीं देगी तो उसके पास एक तिहाई सीटें के लिए उम्मीदवार नहीं मिलेंगे।

इस सिलसिले में दूसरी जरूरी बात यह भी है कि चुनाव आयोग या अदालतें यह स्पष्ट नहीं कर रही हैं कि दागी का क्या मतलब निकाला जाए। इसे स्पष्ट करने का कई बार प्रयास हुआ। ऐसा कानून बनाने का प्रयास भी हुआ कि जिनके खिलाफ गंभीर अपराध के मामले में आरोपपत्र दाखिल हो जाए उन्हें चुनाव लड़ने से रोका जाए। पर सफलता नहीं मिली। इसलिए दागी किसे कहा जाए, यह परिभाषित नहीं है। अनेक नेताओं पर राजनीतिक मुकदमे हैं, अनेक नेताओं पर राजनीति से प्रेरित मुकदमे होते हैं और अनेक लोगों पर सचमुच गंभीर अपराध के मुकदमे होते हैं। सो, ऐसे लोगों को जो सचमुच अपराधी हों अपना अपराध छिपाने के लिए राजनीति में आते हैं या गंभीर अपराध के मुकदमे हों उन्हें कानूनी तरीके से रोका जाएगा तभी बात बनेगी। पार्टियां तो सिर्फ चुनाव जीतने की संभावना देख कर ही टिकट देंगी। दागी छवि वाले को नहीं देंगी तो उसके परिवार के किसी सदस्य को देंगी और चुनाव आयोग कुछ नहीं कर सकेगा।

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