लवासा को हटाने का बड़ा मतलब! - Naya India
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लवासा को हटाने का बड़ा मतलब!

क्या चुनाव आयुक्त अशोक सवाला को किसी समझौते के तहत चुनाव आयोग से हटाया जा रहा है और एशियाई विकास बैंक, एडीबी में बतौर उपाध्यक्ष नियुक्त किया जा रहा है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि वे अगले साल अप्रैल में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त होने वाले हैं। लेकिन उससे ठीक पहले वे चुनाव आयोग छोड़ कर एडीबी में जा रहे हैं। चुनाव आयोग के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब कोई चुनाव आयुक्त कार्यकाल पूरा होने से पहले आयोग छोड़ रहा है। पहली घटना दशकों पहले की है। यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है कि लवासा के परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ आय कर विभाग की जांच चल रही है। उनके चुनाव आयोग छोड़ कर जाने को इससे जोड़ कर देखा जा रहा है।

हरियाणा काडर के आईएएस अधिकारी अशोक लवासा ने पिछले साल लोकसभा चुनाव के समय चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने के आयोग के फैसले पर सवाल उठाया था। उन्होंने यहां तक कहा था कि उनकी आपत्ति को रिकार्ड पर लिया जाए, हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त ने इसे नहीं माना था। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर लवासा अप्रैल 2021 में मुख्य चुनाव नियुक्त होते तो टकराव बढ़ सकता था।

ध्यान रहे लवासा का कार्यकाल 2022 के अक्टूबर तक होता यानी डेढ़ साल वे मुख्य चुनाव आयुक्त रहते। इस दौरान 11 राज्यों के चुनाव उनकी देख-रेख में होते। पांच राज्यों- पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुड्डुचेरी में अगले साल चुनाव हैं और उसके अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, मणिपुर और गोवा में चुनाव होने वाले हैं। लवासा के हटने के बाद भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी और वरिष्ठता क्रम में तीसरे चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा मुख्य चुनाव आयुक्त बनेंगे। वे संभवतः पहले गैर आईएएस अधिकारी हैं, जो इस पद पर पहुंचेंगे। बहरहाल, अशोक लवासा का चुनाव आयोग से हटना सरकार के लिए राहत की बात होगी तो उम्मीद की जा रही है कि लवासा और उनके परिवार को भी राहत मिल जाएगी।

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