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Thursday, May 13, 2021
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चुनाव खत्म, दाम बढ़ना चालू

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पश्चिम बंगाल और पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म हुए और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने लगे। मार्च और अप्रैल दोनों महीने में पेट्रोल और डीजल के दाम एक बार भी नहीं बढ़े और दो मई को पांच राज्यों के नतीजे आने के अगले ही दिन यानी तीन मई को पेट्रोल के दाम में 15 पैसे और डीजल की कीमत में 18 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हो गया। क्या अब भी सरकार या सरकारी दल का कोई नेता यह कहेगा क्या कि सरकार या सत्तारूढ़ के हितों के मुताबिक पेट्रोल और डीजल के दाम नियंत्रित नहीं किए जाते हैं? क्या इसके बाद भी यह कहा जाएगा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बाजार के हवाले हैं और सरकार का उस पर कोई नियंत्रण नहीं है?

अगर सरकार का नियंत्रण नहीं है तो क्या जादू के जोर से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ना बंद हो गए थे, जबकि अप्रैल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने लगा था? सोचें, पेट्रोलियम कंपनियों ने जनवरी में 10 बार और फरवरी में 16 बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए थे। 26 फरवरी को चुनाव की घोषणा होने के एक दिन बाद 27 फरवरी को आखिरी बार दोनों पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ी थी। उसके बाद दो महीने जब तक चुनाव चला तब तक एक बार भी दाम नहीं बढ़े। उलटे दो या तीन बार तो दाम कम भी हुए। नतीजों के अगले दिन बढ़ोतरी शुरू होने के बाद अब मध्य प्रदेश और राजस्थान में कई जगहों पर पेट्रोल की कीमत 101 रुपए प्रति लीटर से ज्यादा हो गई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी पेट्रोल के दाम 90 रुपए लीटर से ऊपर पहुंच गए।

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