क्या बिना स्टैट्स बदले कश्मीर में चुनाव?

अगले महीने पहले हफ्ते में जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए को खत्म हुए एक साल हो जाएंगे। एक साल पहले चार अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किया था और राज्य को दो हिस्सों में बांटने के साथ ही इसे केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया था। तब केंद्र सरकार ने कहा था कि लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश रहेगा और जल्दी ही केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल कर देगी। इस बात के एक साल होने जा रहे हैं औऱ अभी तक इसके लिए कोई पहल होती नहीं दिख रही है। हालांकि पिछले दिनों भाजपा के नेताओं ने भी कहा कि जल्दी ही राज्य का पूर्ण दर्जा बहाल होगा।

तभी सवाल है कि केंद्र सरकार की कृपा पाकर हिरासत से रिहा हुए नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने यह क्यों कहा कि अगर कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल हुए बगैर चुनाव हुआ तो वे उनकी पार्टी चुनाव नहीं लड़ेगी? क्या कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल हुए बगैर ही चुनाव आयोग चुनाव करा लेगा? ध्यान रहे राज्य प्रशासन और चुनाव आयोग में अलग ठनी है। राज्यपाल प्रशासन की ओर से कहा गया कि परिसीमन का काम पूरा होने के बाद राज्य में चुनाव होगा। इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि चुनाव कब होगा यह तय करना आयोग का काम है।  ऐसा लग रहा है कि उमर अब्दुल्ला को कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने के बारे में कुछ पक्की जानकारी है और उन्होंने इसी वजह से यह बयान दिया है। ध्यान रहे पिछले कुछ समय से इस बात की चर्चा चल रही है कि भाजपा और नेशनल कांफ्रेंस का तालमेल हो सकता है। ऐसे में संभव है कि उमर अब्दुल्ला को पता चल गया हो कि सरकार राज्य का दर्जा बहाल करने वाली है और वे इस बात का श्रेय लेने के लिए बयान दे रहे हों। ध्यान रहे अब अगर चुनाव से पहले कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल होता है तो उमर की पार्टी इसका श्रेय लेगी कि उसके दबाव में केंद्र ने यह फैसला किया है।

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