संसद में विपक्ष लाए कानून रद्द का प्रस्ताव

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केंद्र सरकार के बनाए तीन केंद्रीय कानून के विरोध में चल रहे आंदोलन का अंत नतीजा क्या होगा या केंद्रीय कानूनों का भविष्य क्या है इन सवालों पर चल रही अटकलों के बीच एक सवाल यह भी है कि विपक्ष क्या सिर्फ शोर मचाएगा या कोई सकारात्मक पहल करेगा? आमतौर पर विधायी मामलों में कमजोर विपक्ष के पास कुछ ज्यादा विकल्प नहीं होते हैं। लेकिन इस बार हालात ऐसे हैं कि विपक्ष पहल कर सकता है। सरकार ने किसानों के सामने जो प्रस्ताव रखा है या जिन दूसरे मुद्दों पर बात हो रही है उसे विपक्ष आगे बढ़ा सकता है। विपक्ष संसद में अपनी ओर से प्रस्ताव लाकर तीनों कृषि कानूनों पर रोक लगवाने की पहल कर सकती है।

ध्यान रहे प्रधानमंत्री ने खुद पहल करके कहा है कि सरकार किसानों के साथ बातचीत के जरिए सभी मुद्दों का जल्दी से जल्दी समाधान करना चाहती है। इसके बाद ही किसानों के साथ सरकार की बातचीत आगे बढ़ी है। सरकार ने किसानों को जो प्रस्ताव दिया है और जिसका जिक्र प्रधानमंत्री ने भी किया उसमें कहा गया है कि सरकार तीनों कानूनों पर डेढ़ साल तक रोक लगाने के लिए तैयार है। इस बीच एक कमेटी बना दी जाएगी, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी सहित दूसरे तमाम मुद्दों पर विचार करेगी।

सरकार के इस प्रस्ताव में जो पेंच है वह भरोसे का है। किसानों का कहना है कि संसद के दोनों सदनों से पास कर कर और राष्ट्रपति के दस्तखत से जो कानून बना है और जिसके नियम अधिसूचित हो चुके हैं उन्हें सरकार मुंहजबानी कैसे रोक सकती है। अगर सरकार संसद में कानून बना कर इन कानूनों पर रोक लगाए और एमएसपी पर कानून का वादा करे तो किसानों के साथ सहमति बन सकती है।

तभी इस मामले में विपक्ष की भूमिका दिख रही है। अगर विपक्ष सकारात्मक भूमिका निभाना चाहे और सरकार को कानूनों पर रोक के लिए मजबूर करना चाहे तो कृषि कानूनों पर रोक का प्रस्ताव संसद में ला सकती है। कांग्रेस पार्टी भी ऐसा प्रस्ताव ला सकती है या विपक्षी पार्टियों का कोई सांसद प्राइवेट मेंबर बिल भी ला सकता है। इसके दो फायदे हैं। पहला तो यह कि इससे विपक्ष की गंभीरता दिखेगी। दूसरे, सरकार की असलियत भी जाहिर होगी। अगर सरकार सचमुच कानूनों पर रोक लगाने के प्रस्ताव के प्रति गंभीर है और ईमानदारी से चाहती है कि इन कानूनों पर दो महीने से ज्यादा समय से चल रहा गतिरोध खत्म हो और साथ ही तो वह इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देगी। लेकिन मुश्किल यह है कि अगर विपक्ष के प्रस्ताव पर इन कानूनों पर रोक लगती है तो उसका श्रेय भी विपक्षी पार्टियां ले जाएंगी। अगर सरकार विपक्ष को श्रेय नहीं देना चाहती है तो खुद ही इस सत्र में प्रस्ताव लाकर कानूनों पर रोक लगा दे।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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