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Thursday, May 13, 2021
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किसान आंदोलन में किस बात का इंतजार?

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भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट दोनों किसान आंदोलन के मामले में किस बात का इंतजार कर रहे हैं? आंदोलन खत्म कराने के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किया जा रहा है? देश के कई राज्यों के किसान 160 दिन से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। वे केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं और उसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने आखिरी बार किसानों के साथ 22 जनवरी को वार्ता की थी। उसके बाद बातचीत बंद है। यह अलग बात है कि प्रधानमंत्री और कृषि व किसान कल्याण मंत्री दोनों उसके बाद कई बार कह चुके हैं कि सरकार किसानों से बात करने को तैयार है पर किसानों से वार्ता के लिए कृषि मंत्रालय की ओर से कोई पहल नहीं हुई है।

हैरानी की बात है कि सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के जरिए केंद्र के बनाए तीनों कानूनों पर रोक लगी है और सरकार यह रोक हटवाने का भी प्रयास नहीं कर रही है। सरकार के कथित आर्थिक जानकार बता रहे हैं कि अगर कानूनों पर अमल नहीं हुआ तो 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य पूरा नहीं होगा। अगर सरकार इस लक्ष्य के प्रति गंभीर है तो उसे अदालत में जाकर अपील करनी चाहिए कि इन कानूनों के अमल पर लगाई गई रोक हटाई जाए। लेकिन सरकार ने रोक हटवाने जा रही है और न किसानों का आंदोलन खत्म कराने की कोई पहल कर रह है।

सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी भी हैरान करने वाली है। जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यों की एक कमेटी बना कर इस मामले में सलाह-मशविरे की प्रक्रिया शुरू कराई थी। हालांकि आंदोलनकारी किसान इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए फिर भी देश के अनेक किसान संगठनों और जानकारों ने अपनी राय सुप्रीम कोर्ट की कमेटी को दी है और कमेटी ने अपनी रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है। लेकिन उस रिपोर्ट पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। तभी यह रहस्य बनता जा रहा है कि आखिर अदालत और सरकार दोनों किस बात का इंतजार कर रहे हैं। यह सही है कि धरने की जगहों पर किसानों की संख्या कम हो गई है पर क्या सरकार और अदालत का फैसला लोगों की भीड़ पर निर्भर करता है?

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