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Sunday, April 18, 2021
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सुप्रीम कोर्ट की समिति पर नजर

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केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को समाप्त कराने और किसानों की समस्याओं का समाधान सुझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यों की कमेटी बनाई है। जनवरी के दूसरे हफ्ते में सर्वोच्च अदालत ने यह कमेटी बनाई थी और इसे अपनी रिपोर्ट देने के लिए आठ हफ्ते का समय दिया था। कमेटी के गठन के छह हफ्ते हो गए हैं और अब उसके पास दो हफ्ते बचे हैं। अशोक गुलाटी, प्रमोद जोशी और अनिल घनवट की कमेटी को 12 जनवरी से पहले रिपोर्ट दे देनी है। कमेटी के सदस्य किसान संगठनों से मुलाकात कर रहे हैं। पिछले दिनों ऑल इंडिया किसान कोऑर्डिनेशन कमेटी के सदस्यों से मुलाकात हुई थी और कमेटी ने आम लोगों से इस पर राय मांगी है, जिसके लिए 25 फरवरी तक की तारीख तय की गई थी।

केंद्र सरकार के बनाए कानूनों के विरोध में 92 दिन से आंदोलन कर रहे किसान संगठनों ने अपनी ओर से कहा था कि उन्होंने ऐसी कमेटी की मांग नहीं की थी और वे इसके सामने नहीं जाएंगे। लेकिन तब कमेटी के सदस्यों ने कहा था कि वे आंदोलन कर रहे किसानों से भी संपर्क करेंगे और किसी न किसी तरीके से उन तक पहुंचने का प्रयास करेंगे। सवाल है कि क्या कमेटी के सदस्यों ने आंदोलन कर रहे किसानों से संपर्क का प्रयास किया है? या कमेटी ने मान लिया है कि आंदोलनकारी किसान उनसे वार्ता नहीं करेंगे तो उनसे संपर्क करने की भी जरूरत नहीं है? या कमेटी के सदस्य यह समझ रहे हैं कि अखबार में विज्ञापन दे दिया और आम लोगों से राय मांगी तो इसी में आंदोलनकारी किसान भी कवर हो गए? कम से कम अभी तक यह सूचना नहीं है कि कमेटी ने आधिकारिक रूप से आंदोलनकारी किसानों से संपर्क करने का प्रयास किया है। बहरहाल, आम लोगों की राय मंगाने के बाद अब कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी ताकि तय समय में उसे सुप्रीम कोर्ट को सौंपा जा सके।

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