गलत सूचनाओं से बना मुगालता

जिस तरह से केंद्र सरकार शुरू में किसान आंदोलन को लेकर भ्रम में रही उसी तरह ट्रैक्टर रैली को लेकर भी सरकार मुगालते में थी। आंदोलन शुरू हुआ था तब सरकार के शीर्ष लोगों को उनके प्रबंधकों ने कहा था उत्तर प्रदेश से किसान नहीं आएंगे। यह भी कहा गया था कि हरियाणा में गिने-चुने किसान इन कानूनों के विरोध में आंदोलन में शामिल होंगे। तीसरी बात यह बताई गई कि पंजाब के किसानों को हरियाणा में भाजपा की सरकार रोक लेगी। ये तीनों बातें गलत साबित हुईं। उत्तर प्रदेश और हरियाणा से भी बड़ी संख्या में किसान आंदोलन में शामिल हुए और पंजाब के किसानों को तमाम प्रयास के बावजूद हरियाणा में रोका नहीं जा सका।

किसानों की ट्रैक्टर रैली के मामले में भी ऐसा ही हुआ। जानकार सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर यह सूचना दी गई थी कि ट्रैक्टर रैली में उधर से पांच सौ ट्रैक्टर भी नहीं पहुंचेंगे। किसानों को नोटिस देने से लेकर ट्रैक्टर जब्त करने और डीजल नहीं देने सहित कई  कदम उठाए गए थे।

इन सूचनाओं के जरिए यह धारणा बनाई गई कि दो-तीन सीमाओं पर ही किसान ज्यादा हैं और वहीं से रैली की इजाजत देनी चाहिए। यह बड़ी गलती थी क्योंकि जब दिल्ली की हर सीमा पर बैठा है तो सिर्फ तीन जगह से ट्रैक्टर रैली निकालने की इजाजत क्यों दी गई? इसके पीछे भी मकसद यह दिखाना था कि किसानों का आंदोलन कोई बड़ा आंदोलन नहीं है। अगर पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने सही तरीके से आकलन किया होता और राजनीतिक नेतृत्व अपनी आंखों से परदा हटा कर हकीकत देख रहा होता तो मंगलवार को दिल्ली में जितना भी उपद्रव हुआ उतना भी नहीं होता।

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