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कांग्रेस को हराने में लगीं ममता

Mamta meeting in Delhi

अगले साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हराने में भाजपा से ज्यादा ताकत ममता बनर्जी लगा रही हैं। हालांकि इन पांचों राज्यों में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस कहीं भी लड़ाई में नहीं है फिर भी ममता ने हर जगह पैर फंसाया है और किसी न किसी तरीके से कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने का अभियान चला रही हैं। उन्होंने गोवा में कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री लुइजिन्हो फ्लेरियो को तोड़ कर अपनी पार्टी में मिलाया तो उनकी जिम्मेदारी लगा कर मेघालय में कांग्रेस को तोड़ा। मेघालय के टूटने का बड़ा असर मणिपुर में होगा। वे पहले ही असम में कांग्रेस की नेता सुष्मिता देब को तोड़ कर अपने साथ ला चुकी हैं। अब मणिपुर में कांग्रेस तोड़ने का अभियान चल रहा है। election Mamta banerjee congress

उत्तर प्रदेश में ममता बनर्जी ने कांग्रेस के पुराने नेता राजेश पति त्रिपाठी और ललितेश पति त्रिपाठी को अपनी पार्टी में शामिल कराया है। उन्होंने खुल कर कहा है कि अगर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव चाहेंगे तो वे उनकी मदद करने को तैयार हैं। वे प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों तरह से उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की मदद कर रही हैं। इस तरह गोवा, मणिपुर और उत्तर प्रदेश तीनों राज्यों में, जहां अगले साल चुनाव होने वाले हैं वहां ममता कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने वाली राजनीति कर रही हैं।

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जहां तक पंजाब की बात है तो वे सीधे तौर पर पंजाब की राजनीति में शामिल नहीं हैं लेकिन वे परदे के पीछे से आम आदमी पार्टी की मदद कर रही हैं। उन्होंने इस काम में अपने चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर को लगाया है। इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि प्रशांत किशोर अपनी रणनीति के हिसाब से पंजाब में कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं। ध्यान रहे  वे आम आदमी पार्टी के भी चुनाव रणनीतिकार रहे हैं और हाल ही में कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले कैप्टेन अमरिंदर सिंह के भी सलाहकार रहे हैं। उनके जरिए ममता इन दोनों को मदद पहुंचा कर कांग्रेस का नुकसान कर रही हैं।

अब सवाल है कि कांग्रेस का नुकसान करने के पीछे ममता की क्या सोच है? असल में प्रशांत किशोर ने उनको समझाया है कि अगर विपक्षी राजनीति की धुरी बननी है तो उसके लिए कांग्रेस को कमजोर करना होगा। कांग्रेस अगर टूटती है और राज्यों में हारती है तो 2024 से पहले विपक्षी एकता के प्रयासों में वह राजनीति का केंद्र नहीं बन पाएगी। उस समय कांग्रेस को रिप्लेस करके ममता बनर्जी केंद्र में आ सकती हैं। इस तरह ममता को विपक्षी राजनीति का केंद्र बना कर प्रशांत किशोर उनको 2024 के चुनाव के लिए पीएम का दावेदार बना रहे हैं। अगले लोकसभा चुनाव में मोदी बनाम ममता का चुनाव बनाने के लिए कांग्रेस का कमजोर होना जरूरी है। इस काम में कांग्रेस के दूसरे सहयोगियों का भी परोक्ष समर्थन ममता के साथ है।

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