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चुनाव पर इतनी अनिश्चितता क्यों?

इससे पहले शायद ही कोई ऐसा चुनाव रहा होगा, जिसमें इतनी किस्म की अनिश्चितताएं दिखी हों। पुड्डुचेरी से लेकर केरल और पश्चिम बंगाल से लेकर असम तक जिन पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं वहां कोई न कोई विवाद, अनिश्चितता, आरोप या गड़बड़ी देखने को मिली है। यह चुनाव आयोग की स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराने की क्षमता पर बड़ा सवाल है। असम में दो मामले ऐसे हुए हैं, जिनसे आयोग पर बड़ा सवाल उठा है। एक मामला भाजपा उम्मीदवार की गाड़ी में ईवीएम मिलने का है तो दूसरा मामला एक ऐसे मतदान केंद्र का है, जहां कुल 70 मतदाताओं के नाम दर्ज थे, लेकिन 181 वोट पड़ें। सोचें, वोटिंग के बाद ईवीएम का भाजपा नेता की गाड़ी में मिलना और पंजीकृत मतदाता के दोगुने से ज्यादा पोलिंग होना किस बात का इशारा है! पर ऐसा लग रहा है कि चुनाव आयोग को अपनी साख की ज्यादा परवाह नहीं है।

उधर पुड्डुचेरी में चुनाव से पहले ऐसा विवाद खड़ा हुआ था कि लग रहा था कि चुनाव ही नहीं होगा। भाजपा ने आरोप लगाया था कि बड़ी संख्या में लोगों के आधार कार्ड का डाटा इस्तेमाल करके लोगों के फोन नंबर हासिल कर लिए गए हैं और उनका चुनाव में इस्तेमाल हो रहा है। यह मामला मद्रास हाई कोर्ट में पहुंचा था, जहां अदालत ने चुनाव आयोग से रिपोर्ट मांगी थी। इसी तरह केरल में कांग्रेस पार्टी के नेता रमेश चेन्निथला ने पिछले दिनों राज्य की 50 से ज्.दा विधानसभा सीटों के एक लाख 73 हजार से ज्यादा बोगस मतदाताओं की एक सूची प्रेस कांफ्रेंस करके जारी की थी। इसके बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि पूरे प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम नए सिरे से होगा। अगर ऐसा होता तो चुनाव टल जाते। लेकिन तमाम विवादों के बावजूद चुनाव आयोग की ओर से सब चंगा होने का ही बयान आता है।

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