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कोविड में विफलता का भी नुकसान

भारतीय जनता पार्टी के नेता मानें या न मानें पर पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में कोरोना संक्रमण की महामारी एक बड़ा मुद्दा बन गई थी। खास कर आखिरी चार चरण में। इन्हीं चार चरणों में ममता बनर्जी की पार्टी को सबसे ज्यादा फायदा हुआ। असल में चार चरण का मतदान खत्म होने तक पूरे देश में कोरोना का विस्फोट हो गया था और पश्चिम बंगाल में भी कोरोना बम फूट चुका था। जहां-जहां मतदान हो गए थे वहां कोरोना के ढेरों मामले सामने आने लगे थे। भाजपा ने तो अपनी पीआर रणनीति के तहत मीडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सभाओं की खूब कवरेज कराई थी। लेकिन वह उलटा पड़ गया।

बंगाल में चार चरण का मतदान खत्म होने तक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर कई भाजपा शासित राज्यों जैसे गुजरात, मध्य प्रदेश आदि में कोरोना बेकाबू हो गया था और ऑक्सीजन की कमी से लोगों के मरने की खबरें आने लगी थीं। सो, बंगाल के आखिरी चार चरण के चुनाव में यह मैसेज बना कि भाजपा के नेता कोरोना रोक नहीं पा रहे हैं और उलटे बंगाल में कोरोना फैला रहे हैं। ममता ने इसका और प्रचार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता बाहरी लोगों को प्रचार में ला रहे हैं और मंच बनाने से लेकर प्रचार तक के लिए बाहर के लोग आए हैं, जिनसे कोरोना फैल रहा है। सो, कोरोना के कुप्रबंधन का खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ा।

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