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नैतिकता के अलग अलग पैमाने

भारतीय जनता पार्टी के नेता इस बात का आंदोलन छेड़े हुए हैं कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख को हटाया जाना चाहिए। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की चिट्ठी के बहाने भाजपा के नेता मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भी इस्तीफा मांग रहे हैं। सवाल है कि भाजपा शासित राज्यों में जब इस तरह की चिट्ठियां सामने आईं, सीडी दिखाए गए या अधिकारियों ने बयान दिए तो वहां पार्टी का क्या रवैया रहा? क्या पार्टी ने वहां कोई उदाहरण पेश किया, जो अब महाराष्ट्र उच्च नैतिक पैमाने की बात कर रही है?

जिस तरह से परमबीर सिंह ने चिट्ठी लिख कर खुलासा किया है उसी तरह उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वैभव कृष्णा ने खुलासा किया था। उन्होंने कई सबूतों के साथ कहा था कि राज्य में लखनऊ की मिलीभगत से पुलिस अधिकारियों का एक बड़ा रैकेट चल रहा है, जो पैसे लेकर अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर कराता है। उन्होंने पांच बड़े अधिकारियों के नाम लिए थे। लेकिन राज्य सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसी तरह से गुजरात के पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट ने भी गुजरात दंगों को लेकर कुछ खुलासे किए थे। लेकिन क्या हुआ? एक 20 साल पुराने केस में खुद संजीव भट्ट ही जेल में बंद हैं।

उधर कर्नाटक में राज्य सरकार के एक मंत्री की वीडियो सीडी सामने आई, जिसमें वे एक महिला के साथ नजर आ रहे हैं। बताया गया कि नौकरी देने के नाम पर उन्होंने महिला का शोषण किया। मंत्री का तो इस्तीफा हो गया लेकिन क्या मुख्यमंत्री ने कोई जिम्मेदारी ली? इस घटना के बाद छह मंत्री अदालत पहुंचे और कहा कि उनकी भी सीडी आ सकती है, इसलिए अदालत उसके प्रसारण पर रोक लगाए। जाहिर है छह और मंत्रियों की ऐसी सीडी है। इससे पहले भाजपा के ही अपने एक विधायक ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की सीडी है, जिसे दिखा कर कुछ लोगों ने उन्हें ब्लैकमेल किया और मंत्री बन गए। इसके बाद भी किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई और अब पार्टी महाराष्ट्र में एक हटाए गए पुलिस अधिकारी की चिट्ठी के बहाने सरकार से इस्तीफा मांग रही है!

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