निजता, अभिव्यक्ति की चिंता किसको? - Naya India
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निजता, अभिव्यक्ति की चिंता किसको?

सोचें, भारत के नागरिकों की निजता और अभिव्यक्ति की चिंता में कौन दुबला हो रहा है? कौन इसकी लड़ाई लड़ रहा है? अमेरिका का सोशल मीडिया कंपनियां व्हाट्सऐप और ट्विटर भारतीय नागरिकों की चिंता में हैं और उनकी निजता और अभिव्यक्ति की लड़ाई लड़ रही हैं। यह कैसी विडंबना है कि जिन कंपनियों के ऊपर लोगों की निजता से समझौता करने और गोपनीय डाटा इकट्ठा करने, उन्हें लीक करने या बेचने के आरोप है या जो कंपनियां मनमाने तरीके से लोगों की बोलने-लिखने की आजादी को नियंत्रित करती हैं वो भारत सरकार को सबक दे रही हैं और अदालत में जाकर नागरिकों की निजता और अभिव्यक्ति के मुद्दे उठा रही हैं!

इससे भी बड़ी विडंबना यह है कि भारत सरकार इस मामले में यह कह कर बचाव कर रही है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और उसको ये कंपनियां नसीहत न दें। सोचें, क्या भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है इसलिए यह मान लिया जाए कि देश में लोगों की निजता सुरक्षित है और अभिव्यक्ति की आजादी है? यह बहुत सतही तर्क है और यह तर्क पेश करने से पहले सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इस बारे में सोचना चाहिए था। यह अपने आप में इस बात का सबूत है कि भारत सरकार के पास इस मामले में कहने को ज्यादा कुछ नहीं है।

गौरतलब है कि व्हाट्सऐप ने लोगों की निजता का मामला उठाया है और ट्विटर ने अभिव्यक्ति की आजादी की मुद्दा उठाया है। इसके जवाब में सरकार ने ट्विटर से कहा है कि वह खुद भी निजता के अधिकार के प्रति प्रतिबद्धता नहीं दिखा रही है। इस तरह सरकार के दो तर्क हैं।  पहला यह कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और दूसरा यह कि अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनियां भी इन अधिकारियों के प्रति प्रतिबद्धता नहीं दिखा रही हैं। इन दोनों से अंतिम रूप से यह साबित नहीं होता है कि भारत सरकार लोगों की निजता और अभिव्यक्ति की आजादी के प्रति गंभीर है।

असल में सरकार किसी हाल में सोशल मीडिया कंपनियों और उनके कंटेंट को नियंत्रित करना चाहती हैं। इसलिए उसे हर मैसेज के ओरिजिन की जानकारी चाहिए ताकि वह सरकार और सत्तारूढ़ दल के खिलाफ वायरल होने वाले संदेशों की उत्पत्ति का पता लगा सके और कार्रवाई कर सके। ध्यान रहे पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया में सरकार के विरोध में बड़ी संख्या में पोस्ट डाली जाने लगी है और वह वायरल भी हो रही है। सो, सरकार को असली चिंता अपनी छवि की है, लोगों की निजता और अभिव्यक्ति की आजादी दूसरे नंबर पर है। हालांकि यह भी विडंबना है कि मौजूदा सरकार और सत्तारूढ़ दल का पिछले सात साल में विपक्ष पर हमले का मुख्य हथियार सोशल मीडिया ही रहा है पर इन दिनों आईटी सेल कमजोर पड़ता दिख रहा है।

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