GDP increased economic recovery आम लोगों के खर्च से बढ़ी है जीडीपी
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आम लोगों के खर्च से बढ़ी है जीडीपी

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GDP increased economic recovery भारत सरकार इस बात के लिए अपनी पीठ थपथपा रही है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी 20.1 फीसदी की दर से बढ़ी है। हालांकि सबको पता है कि इतनी ऊंची विकास दर इस वजह से है क्योंकि पिछले साल की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी 24.4 फीसदी माइनस में रही थी। सो, लो बेस इफेक्ट की वजह से विकास दर ऊंची दिख रही है। लेकिन इतनी ऊंची विकास दर भी सरकार के किसी प्रयास से नहीं बढ़ी है, बल्कि आम लोगों का खर्च बढ़ने की वजह से बढ़ी है। आम लोगों का खर्च भी किसी सरकारी प्रयास से नहीं बढ़ा है क्योंकि सरकार ने कोरोना महामारी के बीच किसी को नकद नहीं दी है। आम लोगों का खर्च अपने जमा पैसों से या जेवर आदि गिरवी रख कर लिए गए कर्ज से बढ़ा है। गौरतलब है कि सोना गिरवी रख कर कर्ज लेने की दर में भारी इजाफा हुआ है। स्टेट बैंक के गोल्ड लोन में दो सौ फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

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बहरहाल, सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल अप्रैल से जून की तिमाही में देश के लोगों ने 14 लाख 94 हजार करोड़ रुपया खर्च किया था। इस साल पहली तिमाही में यानी अप्रैल से जून के बीच लोगों का खर्च बढ़ कर 17 लाख 83 हजार करोड़ हो गया। यानी लोगों का खर्च तीन लाख करोड़ रुपया बढ़ा। इस बीच इसी अवधि में सरकारी खर्च में कमी हो गई। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही सरकार ने चार लाख 42 हजार करोड़ खर्च किया था लेकिन इस यह घट कर चार लाख 21 हजार करोड़ हो गया। यानी सरकार ने पिछले साल की पहली तिमाही के मुकाबले 21 हजार करोड़ रुपए कम खर्च किए। जाहिर है लोगों ने कर्ज लेकर, सेना गिरवी रख कर या परिवार की संपत्ति बेच कर पैसे जुटाए और परिवार चलाने के लिए खर्च किया। उससे देश की जीडीपी बढ़ी है।

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