राजनीति

कारपोरेट टैक्स छूट की हकीकत का खुलासा

केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रह्मण्यम ने कारपोरेट टैक्स छूट का खुलासा किया है। उन्होंने बताया है कि इसका फैसला चार-पांच साल पहले ही होना था। यानी अभी देश के कारपोरेट घरानों को सरकार ने एक लाख 45 हजार करोड़ रुपए की जो छूट दी है वह चार-पांच साल पहले दी जानी थी। सोचें, अगर उस समय सरकार ने शुल्क में कमी की होती तो क्या होता? सुब्रह्मण्यम ने कहा है कि विपक्ष ने सूट बूट की सरकार का जो हल्ला मचाया था उसकी वजह से केंद्र सरकार फैसला नहीं कर पाई।

ध्यान रहे जनवरी 2015 में अमेरिका के उस समय के राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौरे के समय प्रधानमंत्री मोदी ने अपना नाम लिखा हुआ करीब दस लाख रुपए का सूट पहना था। तभी राहुल गांधी ने सूट बूट की सरकार बता कर मोदी सरकार पर हमले शुरू किए थे। सुब्रह्मण्यम के खुलासे से जाहिर हुआ है कि भले ऊपर से नहीं दिख रहा हो पर यह हकीकत है कि विपक्ष के प्रचार से सरकार प्रभावित होती है और उसके फैसले भी प्रभावित होते हैं।

यह अलग बहस है कि उस समय अगर कारपोरेट को छूट मिल गई होती तो क्या होता? इसके पक्ष और विपक्ष दोनों में बातें हैं। हो सकता है कि तब देश की आर्थिक स्थिति अभी से थोड़ी बेहतर होती या यह भी संभव था कि सरकार का राजकोषीय व वित्तीय घाटा ज्यादा बड़ा होता है और सरकार मुश्किल में होती। पर विपक्ष के लिए एक सबक यह है कि वह सरकार के फैसलों को लेकर आवाज उठाना जारी रखे।

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