अब तेल कंपनियों से पैसा मांग सरकार ने

केंद्र सरकार के सामने पैसे का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ राजस्व वसूली कम होती जा रही है और दूसरी ओर चाह कर भी सरकार खर्च कम नहीं कर पा रही है। सरकार को अंदेशा है कि उसने खर्च में कटौती की तो विकास दर और नीचे जाएगी। इसका कारण यह है कि विकास दर पांच फीसदी तक भी सिर्फ सरकारी खर्च की वजह से पहुंची है। बाकी निजी निवेश और खर्च तो लगातार कम ही होता गया है। तभी कहा जा रहा है कि सरका इधर उधर से पैसे के जुगाड़ में है ताकि चालू वित्त वर्ष का बेड़ा पार लगे और सरकार के खाता बही में हिसाब किताब ठीक रहे।

खबर है कि सरकार अपना हिसाब किताब ठीक रखने के लिए तेल कंपनियों से पैसा मांग रही है। बताया जा रहा है कि सरकार ने तेल कंपनियों से 19 हजार करोड़ रुपए का लाभांश मांगा है, यह पिछले साल के मुकाबले पांच फीसदी ज्यादा है। दूसरी ओर तेल कंपनियों का कहना है कि पिछले साल उनका मुनाफा घटा है। फिर भी सरकार ज्यादा लाभांश मांग रही है। ओएनजीसी और इंडियन ऑयल पर इसकी मार पड़ेगी। इससे पहले सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक से पैसा मांगने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि सरकार आरबीआई से 45 हजार करोड़ रुपए का लाभांश मांग रही है। आरबीआई के आरक्षित कोष से पहले ही सरकार एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए लेने का फैसला कर चुकी है, जिसमें से एक लाख 43 हजार करोड़ रुपए उसे मिल भी गए हैं। इससे सरकार की परेशानी का अंदाजा लग रहा है।

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