आरोग्य सेतु पर स्पष्टता जरूरी

भारत सरकार आरोग्य सेतु के प्रचार में लगी है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार अपील कर चुके कि लोग आरोग्य सेतु एप अपने मोबाइल में इंस्टाल करें। उन्होंने छह अप्रैल को भाजपा के स्थापना दिवस के मौके पर भी पार्टी के कार्यकर्ताओं से अपील की थी कि कम से कम 40 लोगों के मोबाइल में यह एप डाउनलोड कराएं। फिर राष्ट्र के नाम अपने तीसरे संबोधन में उन्होंने सप्तपदी की शपथ दिलाई तो उसमें एक यह भी कहा कि लोग यह एप इंस्टाल करें।

भारत के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बनाए इस एप के जरिए कोरोना वायरस को फैलने से रोकने का दावा किया जा रहा है। नीति आयोग के अधिकारी अमिताभ कांत का दावा है कि 13 दिन में इसे पांच करोड़ लोगों ने डाउनलोड किया है, जो एक रिकार्ड है। इस एप के जरिए लोगों को कोरोना के संक्रमितों की जानकारी मिलेगी, उनके बारे में एलर्ट मिलेगा, उनसे दूरी बनाने के सुझाव मिलेंगे और इलाज से जुड़ी तमाम बातों की जानकारी मिलेगी।

पर इसके लिए इसे इंस्टाल करने वालों को अपने बारे में ढेर सारी जानकारी देनी होती है। बदले मे उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस बात का भरोसा भी नहीं है कि उनके द्वारा दी गई जानकारी का किसी दूसरे मकसद के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। ऊपर से इसके जरिए फोन हैक होने का खतरा अलग है। तभी भारतीय सेना ने भी इसके इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने को कहा है। सेना की ओर से अपने अधिकारियों और जवानों से कहा गया है कि इसे डाउनलोड करें लेकिन जब कमांड में हों, दफ्तर में हों, किसी अभियान पर हों या संवेदनशील जगह पर हों तो इसे बंद रखें यानी लोकेशन सर्विस और ब्लूटूथ फीचर तभी ऑन करें जब किसी सार्वजनिक जगह पर जाएं। अपने मुख्यालय में या मिलिट्री स्टेशन पर रहने के दौरान इसे बंद रखने को कहा गया है क्योंकि इसके हैक होने का खतरा है। इसके अलावा सभी जवानों से अपने फोन में एंटी वायरस एकदम अपडेट रखने को कहा गया है। सोचें, जिस एप को इस्तेमाल करने में इतनी सावधानी की जरूरत सेना बता रही हो उसके बारे में क्या बनाने वाली एजेंसी को विस्तार से नहीं बताना चाहिए?

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