एनआरसी पर विराम लगाने का समय!

केंद्र सरकार को अब राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, एनआरसी को लेकर सीधी घोषणा कर देनी चाहिए। अब समय आ गया है कि सरकार कहे कि वह पूरे देश में एनआरसी नहीं लागू करने जा रही है। इससे पहले कि एक एक करके विपक्षी शासन वाले राज्यों और खुद भाजपा की सहयोगियों के शासन वाले राज्यों में एनआरसी के विरोध में प्रस्ताव पास हो और केंद्र सरकार पूरी तरह से असहाय हो जाए उससे पहले खुद ही सरकार को आगे बढ़ कर इसे खत्म करने का ऐलान करना चाहिए। जब प्रधानमंत्री कह चुके हैं इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है तो अब यह कह देना चाहिए कि कोई चर्चा होगी भी नहीं।

ध्यान रहे कांग्रेस शासित राज्यों में एनआरसी का खुला विरोध है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे एनआरसी अपने राज्य में लागू नहीं करेंगे। भाजपा विरोधी पार्टियों जैसे तृणमूल कांग्रेस और लेफ्ट की सरकारों ने भी इससे मना कर दिया है। अब भाजपा की सहयोगी जनता दल यू की बिहार सरकार ने इसके खिलाफ विधानसभा से प्रस्ताव पास करा दिया। खबर है कि भाजपा की दूसरी सहयोगी अन्ना डीएमके की तमिलनाडु सरकार भी एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। यह हकीकत है कि राज्यों के सहयोग के बिना एनआरसी नहीं लागू हो सकता है। सो, या तो भाजपा सरकार सिर्फ भाजपा शासित राज्यों में इसे लागू करे या फिर पूरे देश में नहीं लागू करने का ऐलान करे। पर पश्चिम बंगाल और असम चुनावों की मजबूरी ने केंद्र सरकार के हाथ बांधे हैं।

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