सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर

यह पहली बार हुआ है कि कोई कानून पास करने के बाद सरकार उसके समर्थन में प्रचार कर रही है और विपक्ष उसके विरोध में प्रचार कर रहा है। सरकार को अपने मंत्रियों और पार्टी कार्यकर्ताओं को उतार कर संशोधित नागरिकता कानून का समर्थन कराना पड़ रहा है तो दूसरी ओर आम लोग इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके विरोध प्रदर्शन के दो पहलू हैं। एक पूर्वोत्तर का विरोध है, जिसमें हर धर्म, जाति और वर्ग के लोग शामिल हैं तो दूसरी ओर देश के बाकी हिस्सों का विरोध है, जिसमें मोटे तौर पर मुस्लिम समुदाय शामिल है। समर्थन और विरोध दोनों का दायरा बढ़ रहा है और कोई भी पक्ष एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं है।

ऐसे में सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 22 जनवरी को सुनवाई करेगी। इस कानून को असंवैधानिक घोषित करने वाली याचिका पर अदालत को सुनवाई करनी है। साथ ही केंद्र सरकार की ओर से दायर की गई इस याचिका पर भी सुनवाई करनी है कि देश की अलग अलग उच्च अदालतों में इस मामले में दायर मुकदमों को सर्वोच्च अदालत में ट्रांसफर किया जाए और एक ही जगह मामले की सुनवाई हो। बहरहाल, कानून पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ही अब रास्ता निकालना है। आंदोलन का दायरा इतना बड़ा हो गया है कि पुलिस कार्रवाई के दम पर उसे रोका नहीं जा सकता और कानून राजनीतिक रूप से भाजपा के लिए इतना फायदेमंद है कि सरकार उसे वापस लेगी नहीं। तभी रास्ता निकालने की अंतिम उम्मीद सर्वोच्च अदालत से है। …

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