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राजरंग| नया इंडिया| Governments distrust of officials अधिकारियों पर सरकार का अविश्वास!

अधिकारियों पर सरकार का अविश्वास!

सरकार और अधिकारियों के रिश्तों को लेकर दो बातें कही जाती हैं। एक सरकार ऐसी होती है, जो मानती है कि कोई भी अधिकारी है वह उसका है और उसके हिसाब से काम करेगा। दूसरी सरकार होती है, जिसको लगता है कि हमें अपना अधिकारी रखना चाहिए। ऐसा लग रहा है कि मौजूदा सरकार दूसरी थ्योरी पर चल रही है। उसे सभी अधिकारियों पर भरोसा नहीं है इसलिए वे आजमाए हुए अधिकारियों को ही बनाए रखना चाहती है। कैबिनेट सचिव को एक साल का और सेवा विस्तार मिलने के बाद यह बात और प्रमाणित हुई है। कैबिनेट सचिव राजीव गौबा को दूसरा सेवा विस्तार मिला है। उनको अगस्त 2021 में पहला सेवा विस्तार मिला था और इस साल एक और सेवा विस्तार मिल गया। वे अगस्त 2023 तक सर्वोच्च नौकरशाह रहेंगे। उसके अगले साल चुनाव है तो फिर सेवा विस्तार मिल जाए तो हैरानी नहीं होगी।

देश के गृह सचिव अजय भल्ला भी सेवा विस्तार पर हैं। उनका दो साल का निर्धारित कार्यकाल अगस्त 2021 में समाप्त हो गया था। तब उनको एक साल का सेवा विस्तार दिया गया। उनका विस्तारित कार्यकाल इस महीने खत्म हो रहा है। अभी तक उनके उत्तराधिकारी की घोषणा नहीं हुई है। क्या पता उनको फिर सेवा विस्तार मिल जाए और अगर सेवा विस्तार न मिले तब भी कोई दूसरी अहम पोस्टिंग मिल जाएगी। जैसे इंटेलीजेंस ब्यूरो यानी आईबी के निदेशक रहे अरविंद कुमार के साथ हुआ है। उनको पहले आईबी निदेशक के तौर पर सेवा विस्तार मिला और उसके बाद रिटायर हुए तो विजिलेंस कमिश्नर बना कर सीवीसी में बैठा दिया गया। दूसरी खुफिया एजेंसी रॉ के प्रमुख सामंत गोयल भी सेवा विस्तार पर हैं और देश में सबसे ज्यादा चर्चा का कारण बने प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक संजय मिश्रा भी सेवा विस्तार पर हैं। उनके सेवा विस्तार का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सरकार उनको एक-एक साल का दो सेवा विस्तार दे चुकी है। हाल में दिल्ली पुलिस कमिश्नर पद से रिटायर हुए राकेश अस्थाना भी सेवा विस्तार पर ही थे। उनकी जगह नया अधिकारी भी सरकार तमिलनाडु काडर से ले आई है। खुद अस्थाना भी गुजरात काडर के थे।

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