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पटेल राजनीति फिर गुजरात में धुरी?

गुजरात में पटेल हमेशा राजनीति की धुरी रहे हैं। हालांकि केशुभाई पटेल को हटा कर नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद पटेलों का वर्चस्व कम हुआ था। परंतु एक बार फिर ऐसा लग रहा है कि राज्य की राजनीति पटेल समुदाय के ईर्द गिर्द घूम रही है। राज्य में 13 फीसदी आबादी के साथ पाटीदार सबसे बड़ा जातीय समुदाय है। इसके साथ ही आर्थिक व सामाजिक वर्चस्व की वजह से इनका राजनीतिक असर ज्यादा हो गया है। तभी इस बार भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों पटेल समुदाय को साधने में जुटे हैं। इसकी शुरुआत भाजपा ने की, जब विजय रुपानी को हटा कर पार्टी ने भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाया। हालांकि वे बहुत जाने माने पटेल नेता नहीं हैं लेकिन समुदाय को इससे फर्क नहीं पड़ता है।

माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के समर्थन से भूपेंद्र पटेल मुख्यमंत्री बने। उसके बाद भाजपा ने कांग्रेस की राजनीति कर रहे पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को अपनी पार्टी में शामिल कराया। अब एक दूसरे बड़े पटेल नेता और खोडलधाम ट्रस्ट के प्रमुख नरेश पटेल की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई है और वे भी भाजपा का समर्थन करेंगे। उधर आम आदमी पार्टी पाटीदार समाज के ही गोपाल इटालिया को अपना मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने जा रही है। इस बीच पाटीदार आरक्षण के लिए अभियान चलाने वाले संगठन पाटीदार अनामत आंदोलन समिति यानी पास के नेता रहे अल्पेश कथीरिया और धार्मिक मालवीय आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए हैं। ये दोनों पास के संयोजक रहे हैं। पटेल वोट के लिए भाजपा और आप में चल रही खींचतान को देखते हुए कांग्रेस ने अपने को इससे दूर रखा है।

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